एशियन गेम्स: नगोया में आवास पर बवाल के बीच ओसीए का एलान, दोहा-रियाद में बनेगा खिलाड़ियों के लिए एथलीट्स विलेज
एशियन गेम्स के अगले दो संस्करणों में खिलाड़ियों को आवास को लेकर परेशानी नहीं होगी। ओसीए ने बताया कि दोहा 2030 और रियाद 2034 एशियन गेम्स में खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए अलग एथलीट्स विलेज बनाया जाएगा। यह बयान नगोया एशियन गेम्स में आवास व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच आया है।
विस्तार
नगोया में आवास व्यवस्था पर उठे सवाल
आइची-नगोया एशियन गेम्स शनिवार से शुरू होंगे। इन खेलों में खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए आवास व्यवस्था को लेकर काफी चर्चा हो रही है। बड़ी संख्या में लोगों को कंटेनर जैसे कमरों, बंदरगाह पर खड़े क्रूज जहाज और सीमित होटल कमरों में ठहरने की व्यवस्था की गई है। मुसल्लम ने कहा कि एशियन गेम्स का आयोजन बड़े स्तर पर होता है। इसमें 17 हजार से अधिक खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ शामिल होते हैं, जबकि करीब 5,000 तकनीकी अधिकारियों के लिए भी आवास की जरूरत होती है। उन्होंने कहा 'एशियन गेम्स की तुलना किसी अन्य महाद्वीपीय महासंघ के आयोजन से नहीं की जा सकती।'
लागत और भविष्य को भी देखना जरूरी
एथलीट्स विलेज बनाने को लेकर सवाल पूछे जाने पर मुसल्लम ने कहा कि ओसीए निश्चित तौर पर एथलीट्स विलेज चाहता है, लेकिन खेलों के आयोजन की लागत और उसके बाद उस सुविधा के इस्तेमाल को भी ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आयोजकों की योजनाओं को समझना जरूरी है कि खेल खत्म होने के बाद एथलीट्स विलेज का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। उनके मुताबिक, बड़ी रकम खर्च करके गांव बनाना आसान है, लेकिन उसके बाद उसका क्या होगा, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। मुसल्लम ने कहा कि पांच सितारा सुविधाओं वाला एथलीट्स विलेज अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन व्यावहारिकता को भी ध्यान में रखना होगा।
दोहा और रियाद में पहले से तय है एथलीट्स विलेज
ओसीए के मुताबिक, दोहा 2030 और रियाद 2034 एशियन गेम्स में एथलीट्स विलेज की व्यवस्था होगी। मुसल्लम ने बताया कि दोहा में एथलीट्स विलेज का उद्घाटन भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि ओसीए का रुख यह नहीं है कि हर हाल में एथलीट्स विलेज होना ही चाहिए। इसके साथ-साथ उस गांव की विरासत और खेलों के बाद उसके इस्तेमाल की योजना भी महत्वपूर्ण है।
एशियन गेम्स में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में OCA
एशियन गेम्स में लगातार बढ़ती खेलों और खिलाड़ियों की संख्या पर मुसल्लम ने कहा कि सिर्फ खिलाड़ियों की संख्या को देखकर उनकी भागीदारी पर रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने कहा कि वह खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में हैं, न कि खेलों को समर्थन देने के लिए खिलाड़ियों की संख्या कम करने के। मुसल्लम ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि एशिया और दुनिया के कई हिस्सों में राजनीतिक संकट और संघर्ष चल रहे हैं। ऐसे समय में खेलों की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।