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Hindi News ›   Sports ›   Asian Games 2026: Japan Faces Tough Challenge from China in Nagoya, India Eyes Improvement on 107-Medal Haul

एशियन गेम्स: नगोया में जापान के सामने चीन की बड़ी चुनौती, भारत की नजर हांगझोउ के 107 पदकों से आगे निकलने पर

Fri, 18 Sep 2026 10:01 PM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला नेटवर्क, नगोया
अमर उजाला नेटवर्क, नगोया Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 18 Sep 2026 10:01 PM IST
सार

नगोया एशियन गेम्स में मेजबान जापान के सामने चीन की मजबूत चुनौती होगी। 45 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी 43 खेलों में हिस्सा लेंगे। भारत की नजर हांगझोउ में जीते 107 पदकों के आंकड़े को बेहतर करने पर होगी। 2028 ओलंपिक से पहले ये खेल युवा भारतीय खिलाड़ियों के लिए भी खुद को परखने का बड़ा मंच होंगे।

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Asian Games 2026: Japan Faces Tough Challenge from China in Nagoya, India Eyes Improvement on 107-Medal Haul
एशियन गेम्स - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी

विस्तार

एशिया के सबसे बड़े बहु-खेल आयोजनों में शामिल एशियन गेम्स का 20वां संस्करण शनिवार से जापान में शुरू हो रहा है। मेजबान जापान घरेलू दर्शकों के सामने पदकों की बड़ी संख्या हासिल करने की कोशिश करेगा, लेकिन उसके सामने चीन की मजबूत चुनौती होगी। इस बार 45 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी 43 खेलों में पदक के लिए मुकाबला करेंगे। खेल 4 अक्टूबर तक चलेंगे।
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जापान में एशियन गेम्स की तैयारियों और प्रमुख खिलाड़ियों को लेकर द जापान टाइम्स की रिपोर्ट में जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के प्रमुख खिलाड़ियों तथा अलग-अलग खेलों में मुकाबले की तस्वीर सामने रखी गई है।भारत के लिए क्यों अहम हैं नगोया एएशियन गेम्स?भारत के नजरिए से नगोया एशियन गेम्स की अहमियत सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है। 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 107 पदक जीते थे। इस बार भारतीय दल के सामने उस प्रदर्शन को और बेहतर करने की चुनौती होगी।ये खेल 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक से पहले खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच भी हैं। खासकर युवा खिलाड़ियों को एशिया के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ खुद को परखने का मौका मिलेगा। एथलेटिक्स, निशानेबाजी, कुश्ती, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, तीरंदाजी और हॉकी जैसे खेलों में भारतीय प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी।
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जापान के पास ओलंपिक चैंपियनों की ताकत
मेजबान जापान की उम्मीदों का बड़ा चेहरा जिम्नास्ट शिन्नोसुके ओका हैं। उन्होंने पेरिस ओलंपिक में तीन स्वर्ण पदक जीते थे। टीम स्पर्धा, व्यक्तिगत ऑल-अराउंड और हॉरिजॉन्टल बार में उनका प्रदर्शन जापान के लिए खास रहा था।पुरुष जिम्नास्टिक टीम स्पर्धा में जापान और चीन के बीच एक बार फिर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। पेरिस में जापान ने चीन को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता था।

भाला फेंक में हारुका कितागुची पर नजर
एथलेटिक्स में जापान की हारुका कितागुची प्रमुख पदक उम्मीद हैं। पेरिस ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता कितागुची हाल में बुडापेस्ट में वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में 68.92 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ और जापानी रिकॉर्ड बना चुकी हैं।घरेलू मैदान पर उनका प्रदर्शन जापान की पदक उम्मीदों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
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चीन फिर पदक तालिका में बड़ी ताकत
चीन पिछले एशियन गेम्स के प्रदर्शन के आधार पर सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उतरेगा। 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में चीन ने 201 स्वर्ण पदक जीते थे।तैराकी में चीन की टीम पर खास नजर रहेगी। 13 वर्षीय यू जिदी इस बार आकर्षण का केंद्र होंगी। उनके अलावा पुरुषों के 100 मीटर के विश्व रिकॉर्डधारी पैन झानले और 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक के प्रमुख तैराक छिन हाईयांग भी चीन की टीम में हैं।

रिकाको इकी की वापसी भी खास
जापान की तैराक रिकाको इकी की कहानी भी इन खेलों को खास बनाती है। उन्होंने 2018 एशियन गेम्स में छह स्वर्ण पदक जीते थे। इसके बाद उन्हें ल्यूकेमिया का पता चला, लेकिन उपचार के बाद उन्होंने प्रतिस्पर्धी तैराकी में वापसी की और टोक्यो ओलंपिक में जापान का प्रतिनिधित्व किया। नगोया में वह फ्रीस्टाइल और बटरफ्लाई स्पर्धाओं में उतरेंगी।
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बैडमिंटन और टेबल टेनिस में भी कड़ा मुकाबला
बैडमिंटन में जापान और दक्षिण कोरिया के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है। दक्षिण कोरिया की ओलंपिक चैंपियन आन से-यंग प्रमुख खिलाड़ियों में हैं।जापान की अकाने यामागुची और टोमोका मियाजाकी भी चुनौती पेश करेंगी।टेबल टेनिस में जापान की टीम में टोमोकाजु हारिमोटो, मीवा हारिमोटो, सोरा मात्सुशिमा, हिना हयाता और मीमा इतो जैसे खिलाड़ी हैं। हालांकि चीन की टीम इस खेल में भी बड़ी चुनौती होगी।

कुश्ती से जापान को पदकों की उम्मीद
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में कुश्ती जापान के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अकारी फुजिनामी और यूका कागामी जैसी ओलंपिक चैंपियन जापान की टीम को मजबूती देंगी। पुरुष वर्ग में नाओ कुसाका और कोटारो कियूका भी जापान की प्रमुख उम्मीद हैं।

युवा खिलाड़ियों की भी होगी परीक्षा
एशियन गेम्स में पदकों की लड़ाई के साथ यह भी पता चलेगा कि कौन से युवा खिलाड़ी आने वाले वर्षों में महाद्वीप और दुनिया के शीर्ष स्तर पर चुनौती देने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। जापान के लिए घरेलू मैदान पर पदक जीतना प्राथमिक लक्ष्य है, जबकि चीन अपने दबदबे को बनाए रखने की कोशिश करेगा। भारत के लिए यह देखना अहम होगा कि हांगझोउ के 107 पदकों के बाद उसका प्रदर्शन किस दिशा में जाता है और कौन से नए खिलाड़ी बड़े एशियन मंच पर अपनी पहचान बनाते हैं।
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