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एशियाड 2026: 0.6 अंक से चूका गोल्ड! इलावेनिल वलारिवान ने जीता रजत; भारत को मिला दूसरा पदक; पढ़ें उनकी कहानी
Sun, 20 Sep 2026 11:59 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:59 AM IST
सार
आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारत को दूसरा पदक भी शूटिंग से मिला है। स्टार निशानेबाज इलावेनिल वलारिवान ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया। इलावेनिल 252.4 अंक के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं और महज 0.6 अंक से स्वर्ण पदक चूक गईं।
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इलावेनिल
- फोटो : ANI
विस्तार
इलावेनिल ने फाइनल में शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया और लंबे समय तक शीर्ष स्थान पर बनी रहीं। लेकिन आखिरी तीन शॉट में जापान की हिनाता ताइची ने उन्हें पीछे छोड़ दिया। हिनाता ने 253.0 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इलावेनिल 252.4 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। दक्षिण कोरिया की हियोजिन बान ने 230.4 अंक हासिल कर कांस्य पदक जीता। इलावेनिल शुरुआत से ही गोल्ड की रेस में सबसे आगे चल रही थीं, लेकिन अंतिम चरण में हिनाता ने बाजी पलट दी। इस तरह इलावेनिल को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
एशियाड में इलावेनिल का दूसरा पदक
यह आइची-नागोया एशियन गेम्स में इलावेनिल वलारिवान का दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में सोनम मस्कर और विदर्सा कोचलुमकल के साथ मिलकर रजत पदक जीता था। इस तरह इलावेनिल ने अपने एशियन गेम्स अभियान में अब तक दो रजत पदक जीत लिए हैं।
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एशियाड में इलावेनिल का दूसरा पदक
यह आइची-नागोया एशियन गेम्स में इलावेनिल वलारिवान का दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में सोनम मस्कर और विदर्सा कोचलुमकल के साथ मिलकर रजत पदक जीता था। इस तरह इलावेनिल ने अपने एशियन गेम्स अभियान में अब तक दो रजत पदक जीत लिए हैं।
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इलावेनिल
- फोटो : ANI
भारत के खाते में दूसरा पदक
इलावेनिल का रजत भारत का एशियन गेम्स 2026 में दूसरा पदक है। इससे पहले महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में इलावेनिल, सोनम और विदर्सा की तिकड़ी ने रजत पदक जीता था। यानी भारत के दोनों पदक अब तक शूटिंग से आए हैं और दोनों ही रजत हैं।
सोनम छठे स्थान पर रहीं
इसी स्पर्धा के फाइनल में पहुंची दूसरी भारतीय निशानेबाज सोनम मस्कर छठे स्थान पर रहीं। उन्होंने क्वालिफिकेशन में 634.1 अंक हासिल करते हुए फाइनल में जगह बनाई थी। इलावेनिल के रजत पदक के साथ भारतीय शूटिंग टीम ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है।
इलावेनिल का रजत भारत का एशियन गेम्स 2026 में दूसरा पदक है। इससे पहले महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में इलावेनिल, सोनम और विदर्सा की तिकड़ी ने रजत पदक जीता था। यानी भारत के दोनों पदक अब तक शूटिंग से आए हैं और दोनों ही रजत हैं।
सोनम छठे स्थान पर रहीं
इसी स्पर्धा के फाइनल में पहुंची दूसरी भारतीय निशानेबाज सोनम मस्कर छठे स्थान पर रहीं। उन्होंने क्वालिफिकेशन में 634.1 अंक हासिल करते हुए फाइनल में जगह बनाई थी। इलावेनिल के रजत पदक के साथ भारतीय शूटिंग टीम ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है।
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एशियन गेम्स में इन तीनों ने भारत को पहला पदक दिलाया
- फोटो : Twitter
ऐसी है इलावेनिल वलारिवन की कहानी
इलावेनिल का सफर आसान नहीं रहा है। यहां तक पहुंचने की उनकी कहानी एक उधार की राइफल से शुरू हुई थी। इलावेनिल का जन्म दो अगस्त 1999 को तमिलनाडु के कुड्डालोर में हुआ। तीन साल की उम्र में उनका परिवार गुजरात के अहमदाबाद चला गया। पढ़ाई-लिखाई वाले परिवार में पली-बढ़ीं इलावेनिल के पिता वैज्ञानिक हैं और माता-पिता दोनों पीएचडी स्कॉलर हैं। बचपन में खेल उनके लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया थे। वह स्प्रिंटर और लंबी दूरी की धावक रहीं। जूडो और बैडमिंटन भी आजमाया। शूटिंग उनके जेहन में बिल्कुल नहीं थी।
करीब 12-13 साल की उम्र में एक दिन उन्होंने अपने पिता के एक छात्र की बेटी को एयर राइफल से अभ्यास करते देखा। जिज्ञासा में उन्होंने राइफल हाथ में ली। उनकी प्रतिभा नजर आई और इसके बाद उन्होंने स्थानीय पांच दिवसीय राइफल कैंप में हिस्सा लिया। यहीं से उनका शूटिंग का सफर शुरू हुआ।
इलावेनिल का सफर आसान नहीं रहा है। यहां तक पहुंचने की उनकी कहानी एक उधार की राइफल से शुरू हुई थी। इलावेनिल का जन्म दो अगस्त 1999 को तमिलनाडु के कुड्डालोर में हुआ। तीन साल की उम्र में उनका परिवार गुजरात के अहमदाबाद चला गया। पढ़ाई-लिखाई वाले परिवार में पली-बढ़ीं इलावेनिल के पिता वैज्ञानिक हैं और माता-पिता दोनों पीएचडी स्कॉलर हैं। बचपन में खेल उनके लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया थे। वह स्प्रिंटर और लंबी दूरी की धावक रहीं। जूडो और बैडमिंटन भी आजमाया। शूटिंग उनके जेहन में बिल्कुल नहीं थी।
करीब 12-13 साल की उम्र में एक दिन उन्होंने अपने पिता के एक छात्र की बेटी को एयर राइफल से अभ्यास करते देखा। जिज्ञासा में उन्होंने राइफल हाथ में ली। उनकी प्रतिभा नजर आई और इसके बाद उन्होंने स्थानीय पांच दिवसीय राइफल कैंप में हिस्सा लिया। यहीं से उनका शूटिंग का सफर शुरू हुआ।
इलावेनिल
- फोटो : ANI
15 साल की उम्र में लिया बड़ा फैसला
2014 में इलावेनिल के माता-पिता ने उनकी प्रतिभा और जुनून को देखते हुए उन्हें शूटिंग को गंभीरता से अपनाने का समर्थन दिया। 15 साल की उम्र में उन्होंने ओलंपिक कांस्य पदक विजेता गगन नारंग की गन फॉर ग्लोरी अकादमी ज्वाइन की। कोच नेहा चावन के मार्गदर्शन और गगन नारंग की देखरेख में उनकी ट्रेनिंग बेहद कठिन थी। कई बार वह दिन में 10 घंटे तक अभ्यास करती थीं। सुबह-सुबह शूटिंग रेंज पहुंचने के बाद स्कूल जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। शूटिंग के साथ पढ़ाई भी जारी रही और उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में बीए किया। अकादमी के 'प्रोजेक्ट लीप' में चयन के बाद उनका प्रदर्शन और निखरा और वह राष्ट्रीय चयन ट्रायल तक पहुंचीं।
जूनियर से सीधे विश्व नंबर-1 तक
2018 में इलावेनिल ने अंतरराष्ट्रीय जूनियर स्तर पर अपनी पहचान बनाई। सिडनी में आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप में उन्होंने व्यक्तिगत स्वर्ण जीता और क्वालिफिकेशन में 631.4 अंक के साथ जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाया। 2019 में उन्होंने सीनियर स्तर पर भी धमाका कर दिया। महज 20 साल की उम्र में रियो डी जेनेरियो में आईएसएसएफ विश्व कप में 10 मीटर एयर राइफल का स्वर्ण जीतकर वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की सिर्फ तीसरी महिला बनीं। उसी साल पुतियान, चीन में विश्व कप फाइनल का स्वर्ण भी जीता। इसके बाद वह महिला 10 मीटर एयर राइफल की विश्व रैंकिंग में नंबर-1 पर पहुंच गईं।
2014 में इलावेनिल के माता-पिता ने उनकी प्रतिभा और जुनून को देखते हुए उन्हें शूटिंग को गंभीरता से अपनाने का समर्थन दिया। 15 साल की उम्र में उन्होंने ओलंपिक कांस्य पदक विजेता गगन नारंग की गन फॉर ग्लोरी अकादमी ज्वाइन की। कोच नेहा चावन के मार्गदर्शन और गगन नारंग की देखरेख में उनकी ट्रेनिंग बेहद कठिन थी। कई बार वह दिन में 10 घंटे तक अभ्यास करती थीं। सुबह-सुबह शूटिंग रेंज पहुंचने के बाद स्कूल जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। शूटिंग के साथ पढ़ाई भी जारी रही और उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में बीए किया। अकादमी के 'प्रोजेक्ट लीप' में चयन के बाद उनका प्रदर्शन और निखरा और वह राष्ट्रीय चयन ट्रायल तक पहुंचीं।
जूनियर से सीधे विश्व नंबर-1 तक
2018 में इलावेनिल ने अंतरराष्ट्रीय जूनियर स्तर पर अपनी पहचान बनाई। सिडनी में आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप में उन्होंने व्यक्तिगत स्वर्ण जीता और क्वालिफिकेशन में 631.4 अंक के साथ जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाया। 2019 में उन्होंने सीनियर स्तर पर भी धमाका कर दिया। महज 20 साल की उम्र में रियो डी जेनेरियो में आईएसएसएफ विश्व कप में 10 मीटर एयर राइफल का स्वर्ण जीतकर वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की सिर्फ तीसरी महिला बनीं। उसी साल पुतियान, चीन में विश्व कप फाइनल का स्वर्ण भी जीता। इसके बाद वह महिला 10 मीटर एयर राइफल की विश्व रैंकिंग में नंबर-1 पर पहुंच गईं।
इलावेनिल
- फोटो : ANI
ओलंपिक में पदक नहीं, लेकिन सफर जारी रहा
इलावेनिल ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों ही मौकों पर वह व्यक्तिगत पदक नहीं जीत सकीं, लेकिन इन अनुभवों ने उनके खेल को और परिपक्व किया। विश्व स्तर पर उन्होंने वापसी जारी रखी। 2023 में रियो विश्व कप में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने के अलावा उन्हें 2022 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
अब एशियाड में ऐतिहासिक रजत
2025 में इलावेनिल ने कजाकिस्तान के श्यामकेंट में एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में उन्होंने पहले महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत जीता। फिर व्यक्तिगत स्पर्धा में भी 252.4 अंक के साथ रजत अपने नाम किया। वह स्वर्ण से महज 0.6 अंक पीछे रहीं। 12-13 साल की उम्र में संयोग से हाथ में आई एयर राइफल से शुरू हुआ सफर अब एशियन गेम्स के ऐतिहासिक रजत तक पहुंच चुका है। इलावेनिल की कहानी बताती है कि कभी-कभी मंजिल का रास्ता किसी तय योजना से नहीं, बल्कि एक छोटे से संयोग से शुरू होता है।
इलावेनिल ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों ही मौकों पर वह व्यक्तिगत पदक नहीं जीत सकीं, लेकिन इन अनुभवों ने उनके खेल को और परिपक्व किया। विश्व स्तर पर उन्होंने वापसी जारी रखी। 2023 में रियो विश्व कप में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने के अलावा उन्हें 2022 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
अब एशियाड में ऐतिहासिक रजत
2025 में इलावेनिल ने कजाकिस्तान के श्यामकेंट में एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में उन्होंने पहले महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत जीता। फिर व्यक्तिगत स्पर्धा में भी 252.4 अंक के साथ रजत अपने नाम किया। वह स्वर्ण से महज 0.6 अंक पीछे रहीं। 12-13 साल की उम्र में संयोग से हाथ में आई एयर राइफल से शुरू हुआ सफर अब एशियन गेम्स के ऐतिहासिक रजत तक पहुंच चुका है। इलावेनिल की कहानी बताती है कि कभी-कभी मंजिल का रास्ता किसी तय योजना से नहीं, बल्कि एक छोटे से संयोग से शुरू होता है।