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एशियन गेम्स 2026: रजत पदक जीतने के बाद अभय सिंह का बड़ा बयान, भविष्य को लेकर दिया ये संकेत
Sun, 27 Sep 2026 07:07 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Sun, 27 Sep 2026 07:07 PM IST
सार
अभय सिंह ने एशियन गेम्स में पुरुष एकल स्क्वैश में रजत पदक जीता, लेकिन फाइनल में मलेशिया के ईन योव एन से हार गए। मुकाबले के बाद अभय ने कहा कि यह उनका आखिरी एशियन गेम्स हो सकता है, हालांकि उन्होंने इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है।
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अभय सिंह
- फोटो : IANS
विस्तार
भारत के स्क्वाश खिलाड़ी अभय सिंह ने एशियन गेम्स में पुरुष एकल स्पर्धा में रजत पदक जीतने के बाद अपने भविष्य को लेकर बड़ा संकेत दिया है। 28 वर्षीय अभय ने कहा कि नागोया में चल रहे एशियन गेम्स उनका आखिरी एशियाई खेल भी हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी इस बारे में कुछ तय नहीं है। रविवार को खेले गए पुरुष एकल के फाइनल में अभय को मलयेशिया के ईन योव एन के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। 44 मिनट चले मुकाबले में मलेशियाई खिलाड़ी ने अभय को 11-9, 11-5, 11-5 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
'आप कभी नहीं जानते, यह मेरा आखिरी एशियाई खेल हो सकता है'
मुकाबले के बाद अभय ने कहा, 'आप कभी नहीं जानते। यह मेरा आखिरी एशियाई खेल हो सकता है, शायद नहीं। मुझे लगा कि मैंने पहला गेम काफी अच्छा खेला। हम दोनों के बीच कड़ा मुकाबला था।' इस रजत पदक के साथ अभय एशियाई खेलों की पुरुष एकल स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले भारत के केवल दूसरे पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले सौरव घोषाल ने यह उपलब्धि हासिल की थी।
स्वर्ण के साथ ओलंपिक का टिकट भी दांव पर था
इस मुकाबले में सिर्फ स्वर्ण पदक ही दांव पर नहीं था। एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाले खिलाड़ी को लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक के लिए सीधे जगह बनाने का मौका भी मिलना था। अभय इस मौके से चूक गए। ईन योव एन ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी गेम गंवाए बिना खिताब जीता। वह एशियाई खेलों के जरिए लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए जगह बनाने वाले पहले स्क्वैश खिलाड़ी बन गए हैं। ईन ने इससे पहले हांगझोउ में हुए 2022 एशियाई खेलों के फाइनल में भी भारत के सौरव घोषाल को हराया था।
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'दूसरे गेम से उसने बेहतर खेल दिखाया'
फाइनल में हार के बाद अभय ने निराशा जताई, लेकिन मलेशियाई खिलाड़ी के प्रदर्शन की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि दूसरे गेम से उसने बेहतर स्क्वैश खेलना शुरू किया। उसने गेंद को सही जगह पर रखा, बहुत साफ खेला और अच्छी तरह मूव किया। पूरा श्रेय उसे जाता है। आज वह बेहतर खिलाड़ी था।' अभय ने कहा कि हार से उन्हें दुख जरूर हुआ है, लेकिन पूरे सफर को देखते हुए वह निराश नहीं हैं।
'हार का दर्द है, क्योंकि बहुत से लोगों ने मेरे लिए मेहनत की'
अभय ने अपनी टीम, परिवार, सरकार, प्रायोजकों और प्रशंसकों के समर्थन को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके पीछे कई लोगों की मेहनत है और वह उनके लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहते थे। उन्होंने कहा, 'बड़ी तस्वीर में मैं निराश नहीं हूं। आज की हार से जरूर दुखी हूं। बहुत से लोगों ने मेरे लिए काफी मेहनत की है। मैं उन्हें कुछ वापस देना चाहता हूं और अच्छा करना चाहता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'चाहे मेरी टीम हो, सरकार हो, प्रायोजक हों या घर से मिलने वाला समर्थन और प्यार, सभी का योगदान है। मुझे उम्मीद है कि मैंने कोर्ट पर अपना सब कुछ दिया। लेकिन जब आप थोड़ा पीछे रह जाते हैं तो दर्द जरूर होता है।'
माता-पिता के साथ होने से खास रहा एशियाई खेल
अभय ने नागोया में अपने माता-पिता की मौजूदगी को भी खास बताया। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ज्यादा कुछ नहीं कहते, लेकिन उन्हें पता होता है कि कब क्या कहना है। उन्होंने कहा, 'मेरे माता-पिता बहुत अच्छे हैं। वे ज्यादा कुछ नहीं कहते। उन्हें पता होता है कि कब क्या कहना है। उन्हें यहां देखकर अच्छा लगा। वे पिछले एशियाई खेलों में नहीं आ पाए थे, लेकिन मुझे खुशी है कि इस बार वे यहां थे।'
सरकार और तमिलनाडु को भी दिया श्रेय
अभय ने अपने रजत पदक का श्रेय अपनी पूरी टीम और सहयोग करने वाले सभी लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी की सफलता के पीछे बहुत से लोगों की मेहनत होती है। उन्होंने भारतीय सरकार और तमिलनाडु सरकार की ओर से स्क्वैश को मिल रहे समर्थन की भी तारीफ की। अभय ने कहा, 'प्रधानमंत्री के आने के बाद भारतीय खेलों को जिस तरह का समर्थन मिला है, वह शानदार है। स्क्वैश को भी काफी समर्थन मिल रहा है। तमिलनाडु सरकार ने भी मेरा बहुत साथ दिया है। यह पदक उन सभी को समर्पित है।' उन्होंने कहा, 'एक खिलाड़ी के लिए बहुत से लोग पर्दे के पीछे काम करते हैं। मैं सिर्फ कोर्ट पर उतरता हूं, लेकिन उसके पीछे बहुत कुछ होता है, जिसके बारे में लोगों को पता नहीं होता। मैं उम्मीद करता हूं कि वे सभी आज की रात पर गर्व महसूस करेंगे।'
अब टीम स्पर्धा पर नजर
अभय अब एशियाई खेलों की टीम स्पर्धा में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वह थोड़े समय का आराम करेंगे और फिर अमेरिका में होने वाले यूएस ओपन में खेलते नजर आएंगे।
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'आप कभी नहीं जानते, यह मेरा आखिरी एशियाई खेल हो सकता है'
मुकाबले के बाद अभय ने कहा, 'आप कभी नहीं जानते। यह मेरा आखिरी एशियाई खेल हो सकता है, शायद नहीं। मुझे लगा कि मैंने पहला गेम काफी अच्छा खेला। हम दोनों के बीच कड़ा मुकाबला था।' इस रजत पदक के साथ अभय एशियाई खेलों की पुरुष एकल स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले भारत के केवल दूसरे पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले सौरव घोषाल ने यह उपलब्धि हासिल की थी।
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स्वर्ण के साथ ओलंपिक का टिकट भी दांव पर था
इस मुकाबले में सिर्फ स्वर्ण पदक ही दांव पर नहीं था। एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाले खिलाड़ी को लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक के लिए सीधे जगह बनाने का मौका भी मिलना था। अभय इस मौके से चूक गए। ईन योव एन ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी गेम गंवाए बिना खिताब जीता। वह एशियाई खेलों के जरिए लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए जगह बनाने वाले पहले स्क्वैश खिलाड़ी बन गए हैं। ईन ने इससे पहले हांगझोउ में हुए 2022 एशियाई खेलों के फाइनल में भी भारत के सौरव घोषाल को हराया था।
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'दूसरे गेम से उसने बेहतर खेल दिखाया'
फाइनल में हार के बाद अभय ने निराशा जताई, लेकिन मलेशियाई खिलाड़ी के प्रदर्शन की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि दूसरे गेम से उसने बेहतर स्क्वैश खेलना शुरू किया। उसने गेंद को सही जगह पर रखा, बहुत साफ खेला और अच्छी तरह मूव किया। पूरा श्रेय उसे जाता है। आज वह बेहतर खिलाड़ी था।' अभय ने कहा कि हार से उन्हें दुख जरूर हुआ है, लेकिन पूरे सफर को देखते हुए वह निराश नहीं हैं।
'हार का दर्द है, क्योंकि बहुत से लोगों ने मेरे लिए मेहनत की'
अभय ने अपनी टीम, परिवार, सरकार, प्रायोजकों और प्रशंसकों के समर्थन को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके पीछे कई लोगों की मेहनत है और वह उनके लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहते थे। उन्होंने कहा, 'बड़ी तस्वीर में मैं निराश नहीं हूं। आज की हार से जरूर दुखी हूं। बहुत से लोगों ने मेरे लिए काफी मेहनत की है। मैं उन्हें कुछ वापस देना चाहता हूं और अच्छा करना चाहता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'चाहे मेरी टीम हो, सरकार हो, प्रायोजक हों या घर से मिलने वाला समर्थन और प्यार, सभी का योगदान है। मुझे उम्मीद है कि मैंने कोर्ट पर अपना सब कुछ दिया। लेकिन जब आप थोड़ा पीछे रह जाते हैं तो दर्द जरूर होता है।'
माता-पिता के साथ होने से खास रहा एशियाई खेल
अभय ने नागोया में अपने माता-पिता की मौजूदगी को भी खास बताया। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ज्यादा कुछ नहीं कहते, लेकिन उन्हें पता होता है कि कब क्या कहना है। उन्होंने कहा, 'मेरे माता-पिता बहुत अच्छे हैं। वे ज्यादा कुछ नहीं कहते। उन्हें पता होता है कि कब क्या कहना है। उन्हें यहां देखकर अच्छा लगा। वे पिछले एशियाई खेलों में नहीं आ पाए थे, लेकिन मुझे खुशी है कि इस बार वे यहां थे।'
सरकार और तमिलनाडु को भी दिया श्रेय
अभय ने अपने रजत पदक का श्रेय अपनी पूरी टीम और सहयोग करने वाले सभी लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी की सफलता के पीछे बहुत से लोगों की मेहनत होती है। उन्होंने भारतीय सरकार और तमिलनाडु सरकार की ओर से स्क्वैश को मिल रहे समर्थन की भी तारीफ की। अभय ने कहा, 'प्रधानमंत्री के आने के बाद भारतीय खेलों को जिस तरह का समर्थन मिला है, वह शानदार है। स्क्वैश को भी काफी समर्थन मिल रहा है। तमिलनाडु सरकार ने भी मेरा बहुत साथ दिया है। यह पदक उन सभी को समर्पित है।' उन्होंने कहा, 'एक खिलाड़ी के लिए बहुत से लोग पर्दे के पीछे काम करते हैं। मैं सिर्फ कोर्ट पर उतरता हूं, लेकिन उसके पीछे बहुत कुछ होता है, जिसके बारे में लोगों को पता नहीं होता। मैं उम्मीद करता हूं कि वे सभी आज की रात पर गर्व महसूस करेंगे।'
अब टीम स्पर्धा पर नजर
अभय अब एशियाई खेलों की टीम स्पर्धा में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वह थोड़े समय का आराम करेंगे और फिर अमेरिका में होने वाले यूएस ओपन में खेलते नजर आएंगे।