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मन की बात: पीएम मोदी से कार्यक्रम में प्रशंसा पाने वाले राजिंदर सिंह सीनियर कौन हैं? जानें उनके बारे में
Sun, 27 Sep 2026 02:35 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 27 Sep 2026 02:35 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी और कोच राजिंदर सिंह सीनियर की युवा प्रतिभाओं को खोजने और तराशने के प्रयासों की सराहना की। 1980 ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता राजिंदर सिंह अब अकादमी के जरिए गांवों में हॉकी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
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राजिंदर
- फोटो : IANS
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने 'मन की बात' कार्यक्रम की 138वीं कड़ी में पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी राजिंदर सिंह सीनियर की चर्चा की और युवा प्रतिभाओं को पहचान कर उनकी क्षमता को निखारने में उनके निरंतर योगदान की प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैंने इस बार लाल किले से स्पोर्ट्स टैलेंट हंट (खेल प्रतिभा खोज) अभियान का ऐलान किया है। भारत खेलों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करता रहे, इसके लिए गांवों और कस्बों तक पहुंचकर खेल प्रतिभाओं को ढूंढना जरूरी है। कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने इस काम के लिए खुद को समर्पित कर दिया है। उनका एक ही पैशन होता है और वह है प्रतिभाओं को खोजना और उन्हें तराशना।'
पीएम ने कहा, 'हमारे पंजाब में यही काम राजिंदर सिंह सीनियर कर रहे हैं। वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके नाम में सीनियर जुड़ा हुआ है। वे 1980 में ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे। 1982 के हॉकी विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। 2001 में भारत ने पहली बार पुरुष जूनियर विश्व कप का खिताब जीता था। वहीं, 2003 में देश ने सीनियर एशिया कप खिताब जीता था। दोनों मौकों पर राजिंदर सिंह कोच की भूमिका में थे।'
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प्रधानमंत्री ने कहा, 'अब राजिंदर सिंह राउंडग्लास हॉकी अकादमी के जरिए अपने पैशन को आगे ले जा रहे हैं। उनके प्रयासों से गांवों में नई हॉकी एस्ट्रो टर्फ बिछाई जा रही है। उनका लक्ष्य एकदम स्पष्ट है। ऐसे गांवों में प्रतिभाओं की पहचान करना, जहां कोचिंग की सुविधा कम है। उनके प्रयासों से कई खिलाड़ी जूनियर और सीनियर स्तर की टीमों में अपनी जगह बना रहे हैं। उनके समर्पण की जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है।'
राजिंदर सिंह सीनियर भारतीय हॉकी टीम के पूर्व खिलाड़ी रहे हैं। उनका जन्म 7 जनवरी 1958 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। बतौर डिफेंडर और पेनाल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान रखने वाले राजिंदर 1980 में ओलंपिक गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य तो थे ही, 1981-82 विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा था और उन्होंने 12 गोल किए थे। खेल से संन्यास के बाद वह अपनी अकादमी के जरिए युवाओं को बेहतर हॉकी खिलाड़ी बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मन की बात कार्यक्रम में पीएम द्वारा राजिंदर सिंह का जिक्र किया जाना उनकी वर्षों से की जा रही कड़ी मेहनत का परिणाम है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैंने इस बार लाल किले से स्पोर्ट्स टैलेंट हंट (खेल प्रतिभा खोज) अभियान का ऐलान किया है। भारत खेलों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करता रहे, इसके लिए गांवों और कस्बों तक पहुंचकर खेल प्रतिभाओं को ढूंढना जरूरी है। कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने इस काम के लिए खुद को समर्पित कर दिया है। उनका एक ही पैशन होता है और वह है प्रतिभाओं को खोजना और उन्हें तराशना।'
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पीएम ने कहा, 'हमारे पंजाब में यही काम राजिंदर सिंह सीनियर कर रहे हैं। वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके नाम में सीनियर जुड़ा हुआ है। वे 1980 में ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे। 1982 के हॉकी विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। 2001 में भारत ने पहली बार पुरुष जूनियर विश्व कप का खिताब जीता था। वहीं, 2003 में देश ने सीनियर एशिया कप खिताब जीता था। दोनों मौकों पर राजिंदर सिंह कोच की भूमिका में थे।'
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प्रधानमंत्री ने कहा, 'अब राजिंदर सिंह राउंडग्लास हॉकी अकादमी के जरिए अपने पैशन को आगे ले जा रहे हैं। उनके प्रयासों से गांवों में नई हॉकी एस्ट्रो टर्फ बिछाई जा रही है। उनका लक्ष्य एकदम स्पष्ट है। ऐसे गांवों में प्रतिभाओं की पहचान करना, जहां कोचिंग की सुविधा कम है। उनके प्रयासों से कई खिलाड़ी जूनियर और सीनियर स्तर की टीमों में अपनी जगह बना रहे हैं। उनके समर्पण की जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है।'
राजिंदर सिंह सीनियर भारतीय हॉकी टीम के पूर्व खिलाड़ी रहे हैं। उनका जन्म 7 जनवरी 1958 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। बतौर डिफेंडर और पेनाल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान रखने वाले राजिंदर 1980 में ओलंपिक गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य तो थे ही, 1981-82 विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा था और उन्होंने 12 गोल किए थे। खेल से संन्यास के बाद वह अपनी अकादमी के जरिए युवाओं को बेहतर हॉकी खिलाड़ी बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मन की बात कार्यक्रम में पीएम द्वारा राजिंदर सिंह का जिक्र किया जाना उनकी वर्षों से की जा रही कड़ी मेहनत का परिणाम है।