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सीख: आपका व्यवहार ही अपनों को करीब और दूर करता है
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 22 Jan 2018 03:57 PM IST
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सुमन मुंबई से दिल्ली वापस लौट रही थी। रात काफी हो गई थी। सुमन ने घर फोन कर पति से कह दिया था कि वह टैक्सी से आ जाएगी, एयरपोर्ट लेने आने की जरूरत नहीं है। फ्लाइट लैंड हुई और बैग लेने के बाद वह बाहर निकलने लगी। उसके आगे एक व्यक्ति थे, जो शायद पचास की उम्र के होंगे। एयरपोर्ट के गेट पर जैसे ही वह पहुंचे, उनका पूरा परिवार उन्हें लेने आया हुआ था। वह गेट से बाहर निकलते, उससे पहले ही उनका पोता दौड़ता हुआ आया और ट्रॉली के सामने खड़ा हो गया। वह रुके, और उनके पीछे आ रही सुमन भी वहीं रुक गई। उस गेट से निकलने वाले पैसेंजर ज्यादा नहीं थे।
सुमन ने देखा, उस शख्स ने अपने पोते को गोदी में उठाकर गले लगा लिया और प्यार करने लगे। फिर उन्होंने ट्रॉली आगे बढ़़ाई, तो उनका बेटा सामने से आ गया। उन्होंने बेटे को भी गले लगाया। सुमन किनारे से निकलकर आगे जाकर खड़ी हो गई और टैक्सी का इंतजार करने लगी। उसकी नजरें अब भी उसी व्यक्ति पर टिकी थीं। बेटे के बाद उनकी बहू उनसे मिलने आई। और फिर अंत में उनकी पत्नी भी आईं। उस शख्स ने पोते को गोद से उतारा और अपनी पत्नी को कसके गले लगा लिया। सुमन मन ही मन सोच रही थी, कितना प्यारा परिवार है। सब एक-दूसरे को कितना प्यार कर रहे हैं।
तभी वह शख्स अपने परिवार के साथ सुमन के करीब आकर खड़ा हो गया। सुमन बोली, आपको और आपके परिवार को देखकर बहुत अच्छा लगा। आप शायद किसी लंबी यात्रा से लौटे हैं? उस शख्स ने जवाब दिया, जी हां, मैं पूरे दो दिन बाद घर वापस लौटा हूं। सुमन हैरान रह गई। सिर्फ दो दिन! काश कि मेरे भी परिवार वाले मुझसे ऐसे ही मिला करते। वह शख्स बोला, तो इसमें देर कैसी! सोचो नहीं, करो। जो चाहिए, अपने-आप मिल जाएगा। सुमन कुछ देर वहीं खड़ी सोचती रही। सचमुच, यह भी मुमकिन है। लेकिन पहले हमें खुद ऐसा बनना पड़ेगा।
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सुमन ने देखा, उस शख्स ने अपने पोते को गोदी में उठाकर गले लगा लिया और प्यार करने लगे। फिर उन्होंने ट्रॉली आगे बढ़़ाई, तो उनका बेटा सामने से आ गया। उन्होंने बेटे को भी गले लगाया। सुमन किनारे से निकलकर आगे जाकर खड़ी हो गई और टैक्सी का इंतजार करने लगी। उसकी नजरें अब भी उसी व्यक्ति पर टिकी थीं। बेटे के बाद उनकी बहू उनसे मिलने आई। और फिर अंत में उनकी पत्नी भी आईं। उस शख्स ने पोते को गोद से उतारा और अपनी पत्नी को कसके गले लगा लिया। सुमन मन ही मन सोच रही थी, कितना प्यारा परिवार है। सब एक-दूसरे को कितना प्यार कर रहे हैं।
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तभी वह शख्स अपने परिवार के साथ सुमन के करीब आकर खड़ा हो गया। सुमन बोली, आपको और आपके परिवार को देखकर बहुत अच्छा लगा। आप शायद किसी लंबी यात्रा से लौटे हैं? उस शख्स ने जवाब दिया, जी हां, मैं पूरे दो दिन बाद घर वापस लौटा हूं। सुमन हैरान रह गई। सिर्फ दो दिन! काश कि मेरे भी परिवार वाले मुझसे ऐसे ही मिला करते। वह शख्स बोला, तो इसमें देर कैसी! सोचो नहीं, करो। जो चाहिए, अपने-आप मिल जाएगा। सुमन कुछ देर वहीं खड़ी सोचती रही। सचमुच, यह भी मुमकिन है। लेकिन पहले हमें खुद ऐसा बनना पड़ेगा।
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