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आपकी आदतों का कारण, पूर्वजन्म से जुड़ी बातें तो नहीं
अध्यात्मिक गुरु/ सुधांशु जी महाराज
Updated Sun, 06 Mar 2016 12:13 PM IST
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मानव देह में मन का विशेष स्थान है। क्योंकि मन में अगर संतोष है तो सारी दुनिया संतुष्ट दिखाई देती है और मन के अन्दर प्रेम है तो सारा संसार हंसता-गाता हुआ प्रसन्न नजर आता है।
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मतलब यह हुआ कि मन ठीक हो तो सबकुछ अच्छा लगता है, नहीं तो सब बुरा प्रतीत होता है। इंसान व्याकुल और बेचैन रहता है। उसे न घर में चैन आता और न बाहर जाने की इच्छा होती है, क्योंकि मन ठीक नहीं है।
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इस मानव मन के ऊपर जन्म-जन्मांतरों की प्रवृत्तियां, और उनकी परतें जमी रहती हैं। प्रवृत्त मन के अंदर ईर्ष्या, द्वेष, वैर, विरोध, हिंसा, क्रूरता और अपने पूर्वजों के संस्कारों की प्रवृतियां अंकित रहती हैं। जिन प्रवृतियों को हम मानव पूर्व जन्म में काट नहीं पाते, वे इस जन्म में लहर बनकर, बीज बनकर और संस्कार बनकर कर्मों में दिखाई देते हैं।
अनुकूल माहौल मिलने पर वह भयंकर रूप धारण करके सामने प्रकट हो जाता है। इसी कारण से इंसान को दुःख भोगना पड़ता है।
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मन में दबी हुई प्रवृत्तियां आदत बनकर हमेशा सामने आती हैं। संवेदनशील व्यक्ति बहुत बार स्वयं ही अपनी आदत से लज्जित हो जाता है और अपने आप से लज्जित होना अच्छी बात होती है। यह हम सभी को सीखना चाहिए।