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सीख: जब महिला ने मिले हीरे को बिना हिचके किसी और को दे दिया
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 24 Jan 2018 08:47 AM IST
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एक खूबसूरत औरत समुद्र किनारे रेत पर टहल रही थी। एक बूढ़ा दूर एक पत्थर पर बैठकर उसे देख रहा था। औरत का चेहरा चमक रहा था और उसके मुख पर हल्की-सी मुस्कान थी। बूढ़े ने देखा कि समुद्र की लहरों के साथ कोई एक बहुत चमकदार पत्थर, जैसे कि हीरा किनारे आ गया। वह औरत वहीं से गुजर रही थी। उसने उसे उठाकर अपने पर्स में रख लिया। लेकिन उसके हाव-भाव पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। वह वापस रेत पर टहलने लगी।
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बूढ़ा अपनी जगह से उठा और औरत के पास जाकर बोला, मैंने पिछले चार दिन से कुछ भी नहीं खाया है। क्या तुम मेरी मदद कर सकती हो? औरत ने तुरंत अपना पर्स खोला और कुछ खाने को टटोलने लगी। उसने देखा कि बूढ़े की नजर उस पत्थर पर है, जिसे उसने अभी उठाया था। औरत पूरी कहानी समझ गई। उसने तुरंत वह पत्थर निकाला और बूढ़े को दे दिया। यह देखकर बूढ़ा भौंचक्का रह गया।
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उसने सोचा, कहीं उसे फंसाने के लिए इसमें औरत की कोई चाल तो नहीं। बूढ़े ने गौर से उस पत्थर को देखा। वह हीरा था। बूढ़ा सोच में पड़ गया, यदि यह हीरा है, जो इस औरत को मिला, तो इसने इतनी आसानी से यह मुझे कैसे दे दिया? वह औरत पलट कर वापस अपने रास्ते पर आगे बढ़ चुकी थी। उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। वह अब भी उतनी ही शांत थी।
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बूढ़े ने एक बार फिर उस औरत को रोका और पूछा, क्या तुम जानती हो कि जो तुमने मुझे इतनी आसानी से मुझे दे दिया, वह एक बेशकीमती हीरा है? औरत बोली, जी हां। मुझे यकीन है कि यह हीरा ही है। लेकिन मेरी खुशी मेरे अंदर है। समुद्र की लहरों की तरह ही दौलत और शोहरत आती-जाती रहती है। अगर अपनी खुशी को इनसे जोड़ेंगे, तो कभी खुश नहीं रह पाएंगे। बूढ़े ने वह हीरा उसको वापस किया और कहा, यह हीरा तुम रखो और मुझे इससे कई गुना ज्यादा कीमती वह भाव दे दो, जिससे तुमने इतनी आसानी से यह हीरा मुझे दे दिया।