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पूजा करते समय सिले कपड़े पहनते हैं, नुकसान भी जान लीजिए

Wed, 05 Mar 2014 07:02 PM IST
Updated Wed, 05 Mar 2014 07:02 PM IST
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wearing cloth during worship

कीनिया के एक पादरी ने कहा कि महिलाओं को अंतःवस्त्र धारण करके चर्च में नहीं आना चाहिए। इसके पीछे उन्होंने यह तर्क दिया है कि इससे महिलाएं खुद को पूरी तरह स्वतंत्र महसूस नहीं कर पाती हैं।

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तब महिलाएं सिर्फ साड़ी क्यों पहनती हैं

wearing cloth during worship

हिन्दू धर्म में भी कहा गया है कि धार्मिक अनुष्ठान और पूजा करते समय सिले हुए कपड़े नहीं धारण करना चाहिए। इसके पीछे यह मान्यता है कि सिले हुए कपड़े शुद्घ नहीं होते। इन वस्त्रों से बंधन का एहसास बना रहता है और पूरी तरह ध्यान केन्द्रित नहीं हो पाता है।

यही कारण है कि आपने देखा होगा कि विशेष पूजा और अनुष्ठान के समय पुरुष धोती और महिलाएं सिर्फ साड़ी पहनकर पूजन किया करती हैं। यह दोनों ही वस्त्र सिले हुए नहीं होते हैं।

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हज यात्री धारण करते हैं ऐसे वस्त्र

wearing cloth during worship

इस्लाम में भी यह नियम है कि जो हज यात्री मक्का में इबादत करने आते हैं। उन्हें ईबादत से पहले सफेद और बिना सिला हुआ कपड़ा पहनना होता है। इस कपड़े को आदर देने के लिए 'एहराम' नाम से पुकारा जाता है।

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