{"_id":"821a158a-2b0a-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"veer-laxmi-mata","type":"story","status":"publish","title_hn":"वीर लक्ष्मी ","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
वीर लक्ष्मी
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Sat, 10 Nov 2012 01:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
योद्घा और वीरों की अराध्य देवी हैं वीर लक्ष्मी। देवी वीर लक्ष्मी के स्वरूप हैं। चार भुजाधारी वीर लक्ष्मी। यह कमल पर पद्मासन मुद्रा में विराजमान रहती हैं। दो हाथों में कमल व दो हाथ क्रमश: वरद और अभयमुद्रा में होते हैं। इनकी उपासना सौभाग्यवान बना देती है। द्विभुजा वीरलक्ष्मी मां दो भुजाधारी है।
इनका एक हाथ अभय मुद्रा में और दूसरा वरद मुद्रा में होता है। इनकी उपासना सौभाग्य के साथ स्वास्थ्य भी देने वाली होती है। अष्टभुजा वीरलक्ष्मी मां की आठ भुजाएं हैं। आठ भुजाओं में पाश, गदा, कमल वरद मुद्रा, अभय मुद्रा, अंकुश, अक्ष सूत्र और पात्र होते हैं। मां का यह स्वरूप आयु, संपत्ति, ऐश्वर्य और सभी सुख देने वाला माना गया है।
विज्ञापन
इनका एक हाथ अभय मुद्रा में और दूसरा वरद मुद्रा में होता है। इनकी उपासना सौभाग्य के साथ स्वास्थ्य भी देने वाली होती है। अष्टभुजा वीरलक्ष्मी मां की आठ भुजाएं हैं। आठ भुजाओं में पाश, गदा, कमल वरद मुद्रा, अभय मुद्रा, अंकुश, अक्ष सूत्र और पात्र होते हैं। मां का यह स्वरूप आयु, संपत्ति, ऐश्वर्य और सभी सुख देने वाला माना गया है।
विज्ञापन