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Vaishakh Month 2024: वैशाख मास आरंभ, इन चीजों का दान करने से मिलता है पुण्य फल
Thu, 25 Apr 2024 12:46 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 25 Apr 2024 12:46 PM IST
सार
शास्त्र कहते हैं कि जो विष्णुप्रिय वैशाख मास में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पादुका या जूते-चप्पल दान करता हैं,वह यमदूतों का तिरिस्कार करके भगवान श्री हरि के लोक में जाता है।
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Vaishakh Month 2024: वैशाख मास सब प्राणियों की मनोकामना को सिद्ध करता है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Vaishakh Month 2024: धर्मग्रंथों में वैशाख मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी बताया गया है। देव आराधना, दान और पुण्य के लिए श्रेष्ठ मास विशेष होता है। वैशाख के महीने में सब तीर्थ आदि देवता (तीर्थ के अतिरिक्त) बहार के जल में भी सदैव स्थित रहते हैं। भगवान विष्णु की आज्ञा से मनुष्यों का कल्याण करने के लिए वे सूर्योदय से लेकर छः दंड के भीतर तक वहां मौजूद रहते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार इस मास में अलग-अलग वस्तुओं के दान से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं।
जल
कहते हैं जल ही जीवन है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति महात्माओं, थके और प्यासे व्यक्तियों को स्नेह के साथ शीतल जल पिलाता है, उसे उतनी ही मात्रा से दस हजार राजसूय यज्ञों का फल प्राप्त होता है। स्कंद पुराण के अनुसार इस माह में जल दान का सर्वाधिक महत्व है ,जो पुण्य सब दानों से मिलता है और जो फल सब तीर्थों के दर्शन से प्राप्त होता है, उसी पुण्य और फल की प्राप्ति वैशाख मास में सिर्फ जल का दान करने से हो जाती है। यह समस्त दानों से बढ़कर अधिक लाभ पहुंचाने वाला है एवं जल के दान से त्रिदेव की कृपा मिलती है।
वस्त्र, फल और शर्बत
जो वैशाख मास में पहनने के लिए कपड़ों का दान करता है वह इसी जन्म में सब सुखों से संपन्न हो जाता है। इसी प्रकार जो इस गर्मी के महीने में फल और शर्बत का दान देता है उससे उसके पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते है और दान देने वाले के सारे पाप कट जाते हैं।
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दही,खांड और चावल दान करने से मनुष्य को पूर्ण आयु और सम्पूर्ण यज्ञों का फल प्राप्त होता है। इसी प्रकार घी का दान करने वाला मनुष्य अश्वमेघ यज्ञ का फल पाकर विष्णुलोक में आनंद का अनुभव करता है।
पंखा
जो इस मास में ताड़ का पंखा दान करता है,वह सब पापों का नाश करके ब्रह्मलोक को जाता है। धूप और परिश्रम से पीड़ित ब्राह्मण को जो पंखे से हवाकर शीतलता प्रदान करता है, वह इतने ही मात्र से निष्पाप होकर भगवान का पार्षद हो जाता है। जो राह में थके हुए श्रेष्ठ द्विज को वस्त्र से भी हवा करता है, वह भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर लेता है।
अन्न दान
शास्त्रों में अन्नदान को महादान माना गया है। अन्नदान मनुष्यों को शीघ्र ही पुण्य प्रदान करने वाला होता है, इसलिए संसार में अन्न के समान दूसरा कोई दान नहीं है। दोपहर में आए हुए ब्राह्मण मेहमान को या भूखे जीव को यदि कोई भोजन करवाएं तो उसको अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
पादुका
शास्त्र कहते हैं कि जो विष्णुप्रिय वैशाख मास में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पादुका या जूते-चप्पल दान करता हैं,वह यमदूतों का तिरिस्कार करके भगवान श्री हरि के लोक में जाता है।
चटाई
निद्रा से दुःख का नाश होता है,निद्रा से थकावट दूर होती है इसलिए जो मनुष्य तिनके या खजूर आदि के पत्तों से बनी हुई चटाई दान करता है,उसके सारे दुखों का नाश हो जाता है और परलोक में उत्तम गति को पाता है।
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जल
कहते हैं जल ही जीवन है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति महात्माओं, थके और प्यासे व्यक्तियों को स्नेह के साथ शीतल जल पिलाता है, उसे उतनी ही मात्रा से दस हजार राजसूय यज्ञों का फल प्राप्त होता है। स्कंद पुराण के अनुसार इस माह में जल दान का सर्वाधिक महत्व है ,जो पुण्य सब दानों से मिलता है और जो फल सब तीर्थों के दर्शन से प्राप्त होता है, उसी पुण्य और फल की प्राप्ति वैशाख मास में सिर्फ जल का दान करने से हो जाती है। यह समस्त दानों से बढ़कर अधिक लाभ पहुंचाने वाला है एवं जल के दान से त्रिदेव की कृपा मिलती है।
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वस्त्र, फल और शर्बत
जो वैशाख मास में पहनने के लिए कपड़ों का दान करता है वह इसी जन्म में सब सुखों से संपन्न हो जाता है। इसी प्रकार जो इस गर्मी के महीने में फल और शर्बत का दान देता है उससे उसके पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते है और दान देने वाले के सारे पाप कट जाते हैं।
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दही, खांड और चावल का दानदही,खांड और चावल दान करने से मनुष्य को पूर्ण आयु और सम्पूर्ण यज्ञों का फल प्राप्त होता है। इसी प्रकार घी का दान करने वाला मनुष्य अश्वमेघ यज्ञ का फल पाकर विष्णुलोक में आनंद का अनुभव करता है।
पंखा
जो इस मास में ताड़ का पंखा दान करता है,वह सब पापों का नाश करके ब्रह्मलोक को जाता है। धूप और परिश्रम से पीड़ित ब्राह्मण को जो पंखे से हवाकर शीतलता प्रदान करता है, वह इतने ही मात्र से निष्पाप होकर भगवान का पार्षद हो जाता है। जो राह में थके हुए श्रेष्ठ द्विज को वस्त्र से भी हवा करता है, वह भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर लेता है।
अन्न दान
शास्त्रों में अन्नदान को महादान माना गया है। अन्नदान मनुष्यों को शीघ्र ही पुण्य प्रदान करने वाला होता है, इसलिए संसार में अन्न के समान दूसरा कोई दान नहीं है। दोपहर में आए हुए ब्राह्मण मेहमान को या भूखे जीव को यदि कोई भोजन करवाएं तो उसको अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
पादुका
शास्त्र कहते हैं कि जो विष्णुप्रिय वैशाख मास में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पादुका या जूते-चप्पल दान करता हैं,वह यमदूतों का तिरिस्कार करके भगवान श्री हरि के लोक में जाता है।
चटाई
निद्रा से दुःख का नाश होता है,निद्रा से थकावट दूर होती है इसलिए जो मनुष्य तिनके या खजूर आदि के पत्तों से बनी हुई चटाई दान करता है,उसके सारे दुखों का नाश हो जाता है और परलोक में उत्तम गति को पाता है।