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Utpanna Ekadashi 2023: इस साल कब है उत्पन्ना एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Wed, 06 Dec 2023 07:36 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Wed, 06 Dec 2023 07:36 AM IST
सार

Utpanna Ekadashi 2023: उत्पन्ना एकादशी के दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करने पर जगत के पालनहार की असीम कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत करने से श्री हरि विष्णु के साथ धन की देवी मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। 

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Utpanna Ekadashi 2023 date margashirsha ekadashi kab hai know vrat parana time and puja muhurat
उत्पन्ना एकादशी तिथि 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Utpanna Ekadashi 2023: मार्गशीर्ष यानी अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। सभी एकादशियों की तरह उत्पन्ना एकादशी भी श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। यह एकादशी बहुत खास मानी जाती है। इस एकादशी के दिन व्रत करने से व्यक्ति के पिछले जन्म के पापों का भी नाश होता है और उसे मुक्ति मिलती है। उत्पन्ना एकादशी के दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करने पर जगत के पालनहार की असीम कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत करने से श्री हरि विष्णु के साथ धन की देवी मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस साल उत्पन्ना एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, क्या है इसकी पूजा विधि और महत्व...

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उत्पन्ना एकादशी तिथि 2023
मार्गशीर्ष माह की उत्पन्ना एकादशी तिथि की शुरुआत 8 दिसंबर 2023 को सुबह 05 बजकर 06 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 9 दिसंबर 2023 को सुबह 06 बजकर 31 मिनट पर होगा। ऐसे में उत्पन्ना एकादशी का व्रत 8 दिसंबर को रखा जाएगा। 
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व्रत पारण समय: 9 दिसंबर 2023 को दोपहर 01 बजकर 15 मिनट से 03 बजकर 20 मिनट तक

उत्पन्ना एकादशी व्रत की विधि

  • उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प कर शुद्ध जल से स्नान करें। 
  • इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से भगवान विष्णु की पूजा,और रात को दीपदान करना चाहिए।
  • इस एकादशी पर रात में भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करना चाहिए। 
  • व्रत की समाप्ति पर श्री हरि विष्णु से अनजाने में हुई भूल या पाप के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। 
  • अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर पुनः भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। 
  • भोजन के बाद ब्राह्मण को क्षमता के अनुसार दान देकर विदा करना चाहिए।

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उत्पन्ना एकादशी व्रत का महत्व
कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करता है, वह सभी तीर्थों का फल प्राप्त करता है। साथ ही इस व्रत के दिन दान करने से लाख गुना शुभ फल की प्राप्ति होती है। उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। इस व्रत को करने से अश्वमेघ यज्ञ, तीर्थ स्नान व दान आदि करने से भी ज्यादा पुण्य मिलता है।

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