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यहां गंगा खुद करती है शिव का जलाभिषेक

Sat, 02 Feb 2013 04:20 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Sat, 02 Feb 2013 04:20 PM IST
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unique shivling of surat gujrat

शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा के

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वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में बांध लिया। इससे गंगा चन्द्रमा के समान शिव के सिर की शोभा बन गयी। शिव की जटा से निकलने वाली गंगा नित शिव को स्नान कराती है। गंगा और शिव का ऐसा अद्भुत संयोग वर्तमान समय में भी दिख सकता है। लेकिन अन्तर बस इतना है कि यहां साक्षात शिव की बजाय गंगा को शिवलिंग का स्नान करवाते देख सकते हैं।

यह अनुपम शिवलिंग गुराजत के सूरत में स्थित है। यह शिवलिंग खंडित है और इसके चारों ओर कई छिद्र हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि खंडित शिवलिंग की पूजा नहीं करनी चाहिए, लेकिन इस स्थान पर शास्त्रों का यह नियम लागू नहीं होता क्योंकि यहां शास्त्रों एवं वेदों से परे भगवान शिव ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है जिससे खण्डित और छिद्र वाला यह शिवलिंग अखण्डित शिवलिंग की तरह पवित्र और पूजनीय हो गया है।

शिवलिंग के प्रत्येक छेद्र से जल की धारा बाहर निकल रही है और शिव का जलाभिषेक कर ही है। मान्यता है कि आरंभ में यह शिवलिंग भी सामान्य शिवलिंग की तरह अखण्डित थी। एक बार कुछ लुटेरे मंदिर में प्रवेश कर गये और यह सोच कर शिवलिंग पर कुल्हाड़ी से प्रहार करने लगे कि शिवलिंग के नीचे खजाना गड़ा हुआ है।

कुल्हाड़ी के प्रहार से शिवलिंग खंडित हो गया। शिव जी इससे क्रोधित हो गये और शिवलिंग में कई छेद्र हो गये जिससे भवरें निकलकर लुटेरों को काटने लगे। भवरों के आक्रमण से लुटेरे भाग गये। जिन छेदों से भंवरे निकले थे उनसे जल की धारा फूट कर बाहर निकलने लगी। शिवलिंग से निकलने वाली जलधारा को गुप्तगंगा के नाम से जाना जाता है। गुप्तगंगा द्वारा नित्य जलाभिषेक के कारण खंडित होते हुए भी यह शिवलिंग श्रद्धा और आस्था का केन्द्र बना हुआ है।

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