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Surya Saptami 2022 : सूर्य रथ सप्तमी कल ,जानें महत्व, पूजा विधि और मंत्र
Sun, 06 Feb 2022 09:21 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 06 Feb 2022 09:21 AM IST
सार
वेद, पुराण एवं योगशास्त्र में वर्णित है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य की उपासना सर्वथा फलदायी है। इस दिन प्रातः जल्दी उठकर पवित्र नदियों अथवा घर में ही ताज़ा जल से स्नान कर लाल, पीले, गुलाबी या नारंगी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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भविष्य पुराण के अनुसार भगवान भास्कर ने इसी दिन सम्पूर्ण सृष्टि को अपने प्रकाश से आलोकित किया था।
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विस्तार
माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को सूर्य रथ सप्तमी,आरोग्य सप्तमी और चंद्र भागा सप्तमी भी कहते हैं। इस दिन भगवान सूर्य का आविर्भाव हुआ। विश्वकर्मा द्वारा भगवान सूर्य ने इसी दिन अपना उत्तम दिव्य रूप प्राप्त किया था इसलिए इस दिन को सूर्य जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस बार सूर्य उपासना के लिए यह श्रेष्ठ दिन 7 फरवरी को मनाई जाएगी।
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रथ सप्तमी का महत्व
भविष्य पुराण के अनुसार भगवान भास्कर ने इसी दिन सम्पूर्ण सृष्टि को अपने प्रकाश से आलोकित किया था। उन्हें अपनी पत्नी संज्ञा उत्तरकुरु में एवं संतानें भी सप्तमी तिथि के दिन प्राप्त हुईं अतः सप्तमी तिथि भगवान सूर्य को अतिप्रिय है। यह सप्तमी पुण्यदायिनी, पापविनाशिनी तथा कल्याणकारी है। इस सप्तमी से सम्बंधित कथा का उल्लेख भविष्य पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार श्री कृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। अपने इसी अभिमान के मद में उन्होंने दुर्वासा ऋषि, जिनका शरीर तप से दुर्बल हो गया था का अपमान कर दिया। शाम्ब की इस धृष्टता को देखकर उन्होंने शाम्ब को कुष्ठ होने का श्राप दे दिया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने शाम्ब को सूर्य भगवान की उपासना करने को कहा ।शाम्ब ने आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना आरम्भ कर दी जिसके फलस्वरूप उन्हें अपने कष्ट से मुक्ति मिल गई। इस सप्तमी को सूर्य भगवान की पूजा-अर्चना जो श्रद्धालु विधिवत तरीके से करते हैं उन्हें आरोग्य, अच्छी संतान व धन की प्राप्ति होती है।
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पूजा विधि
वेद, पुराण एवं योगशास्त्र में वर्णित है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य की उपासना सर्वथा फलदायी है। इस दिन प्रातः जल्दी उठकर पवित्र नदियों अथवा घर में ही ताज़ा जल से स्नान कर लाल, पीले, गुलाबी या नारंगी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तांबे के लोटे में पवित्र जल लेकर जल में अष्टगंध, लाल पुष्प व अक्षत डालकर ''ॐ सूर्याय नमः '' , इस सरल मंत्र से उदय होते सूर्य को अर्घ्य दें। तिल के तेल का दीपक इस दिन सूर्यनारायण के निमित्त अर्पित करें। उसके पश्चात्त ''ॐ घृणि सूर्याय नमः '' का जाप 108 बार करना चाहिए, संभव हो सके तो आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ भी करें। इस दिन अपाहिजों, गरीबों तथा ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरत की वस्तुएं देनी चाहिए। आज के दिन सूर्य उपासना करने वालों के लिए एक समय नमक रहित भोजन अथवा फलाहार करने का विधान है। पुराणों के अनुसार व्रती को नीले या काले रंग के वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए अन्यथा पूजा निष्फल हो जाती है। पापों का हरण करने वाली इस रथ सप्तमी को भगवान सूर्य के निमित्त किया गया स्नान, दान, हवन, पूजा आदि सत्कर्म हज़ार गुना फलदायक हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति भगवान सूर्य की मानसिक पूजा भी करता है तो वह भी समस्त आदि-व्याधियों से रहित होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता है। जिस प्रकार भगवान भास्कर देव को कोहरा स्पर्श नहीं कर पाता , उसी प्रकार सूर्यनारायण की किसी ना किसी रूप में पूजा करने वाले साधक को किसी भी प्रकार की आपत्तियां स्पर्श नहीं कर पातीं। इस व्रत के प्रभाव से व्रती अपने अभीष्ट मनोरथ को प्राप्त करता है।
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