{"_id":"0fd889e1990ef21ca76268ace1590010","slug":"surya-puja-in-puran","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन स्थान जहां सूर्य की पूजा विशेष फलदायी","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
तीन स्थान जहां सूर्य की पूजा विशेष फलदायी
टीम डिजिटल
Updated Fri, 08 Nov 2013 02:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूर्य देव सर्वव्यापी हैं। दुनिया के किसी भी कोने में इनका दर्शन करते हुए इनकी पूजा दुनिया के किसी भी कोने में आप कर सकते हैं। लेकिन तीन स्थान ऐसे हैं जहां सूर्य की पूजा करना विशेष फलदायी मानी गर्ई है।
विज्ञापन
कालपीः यह स्थान उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में यमुना तट पर स्थित है। प्राचीन काल में इसे कालप्रिया नगरी के ना से जाना जाता था। भगवान श्री कृष्ण के पुत्र शांब को दुर्वासा ऋषि के शाप के कारण कुष्ट रोग हो गया था।
विज्ञापन
मकरंजनगर में स्थित सूर्यकुंड में स्नान करके शांब कुष्ट मुक्त हुए थे। इसलिए शांब ने कालप्रियनाथ सूर्यदेव का मंदिर बनवाया था। माना जाता है कि यहां सूर्य की पूजा करने से त्वचा रोग से मुक्ति मिलती है।
विज्ञापन
इन्द्रवनः भविष्य पुराण में व्रज के उपवनों का वर्णन मिलता है। इन में एक वन है सूर्यवन। पुराण के अनुसार इस वन में सूर्य की आराधना करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
सांबपुरः वर्तमान मुल्तान का प्राचीन नाम सांबपुर है। श्री कृष्ण के पुत्र ने इस नगर की स्थापना की थी। यहां सांब को कुष्ट रोग से मुक्ति के लिए श्री कृष्ण ने सूर्य देव की प्रसन्नता हेतु भव्य यज्ञ का आयोजन किया था।