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Ram Navami 2024: राम नवमी पर प्रभु राम के सूर्य तिलक की तैयारी, जानिए सूर्य उपासना का महत्व और नियम
Wed, 17 Apr 2024 05:20 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 17 Apr 2024 05:20 AM IST
सार
22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला अयोध्या में अपने भव्य महल में विराजमान हुए हैं और अब भगवान राम के जन्मदिन यानी राम नवमी पर भगवान राम सूर्य तिलक होगा।
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ram navami 2024: रामनवमी पर भगवान राम का सूर्य तिलक करीब 4 मिनट तक रामलला के मस्तक की शोभा बढ़ाएंगे।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Surya Tilak On Ram Ravami 2024: देशभर में राम नवमी मनाई जा रही है और इस बार राम नवमी का पर्व बहुत ही विशेष है। 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पहली बार प्रभु श्रीराम के जन्म स्थान अयोध्या में बने भव्य महल में राम नवमी मनाई जा रही है। यहां पर सूर्यवंशी भगवान श्रीराम के माथे पर स्वयं सूर्यदेव तिलक करेंगे। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला अयोध्या में अपने भव्य महल में विराजमान हुए हैं और अब भगवान राम के जन्मदिन यानी राम नवमी पर भगवान राम सूर्य तिलक होगा। रामनवमी पर भगवान राम का सूर्य तिलक करीब 4 मिनट तक रामलला के मस्तक की शोभा बढ़ाएंगे।
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हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्यदेव का विशेष महत्व होता है। वैदिक काल से ही सूर्य को प्रत्यक्ष देवता मानते हुए पूजा-उपासना होती आ रही है। सूर्यदेव को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्त्रोत और पिता का दर्जा हासिल है। त्रेतायुग में भगवान विष्णु के सातवें अवतार के रूप में अयोध्या में सूर्यवंशी और मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम का जन्म हुआ था। भगवान राम अपने दिन की शुरुआत हमेशा सूर्यदेव को जल अर्पित करके किया करते थे। महर्षि अगस्त ने भगवान राम को सूर्य का प्रभावी मंत्र आदित्य ह्रदयस्तोत्र की दीक्षा दी थी।
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सूर्य उपासना का महत्व
शास्त्रों में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है और इनकी उपासना का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में पंचदेव की पूजा-उपासना के बारे में बताया गया है, जिसमें गणेश उपासना, शिव उपासना, विष्णु उपासना, देवी भगवती उपासना और सूर्य उपासना का महत्व होता है। ऐसी मान्यता है प्रतिदिन सूर्य उपासना करने से कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलता है। सूर्यदेव की उपासना बेहद ही सरल मानी गई हैं। सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए रोजाना सूर्योदय पर अर्ध्य दिया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में भी सूर्यदे का विशेष महत्व होता है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मा का कारक और ग्रहों का राजा माना गया है। जातकों की कुंडली में सूर्य का स्थान उनके जीवन में काफी प्रभाव डालता है। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य उच्च और शुभ भाव में होता है उन्हें जीवन में हर तरह का मान सम्मान, कीर्ति और धन की प्राप्ति होती है। सूर्यदेव समूची पृथ्वी में मौजूद जीव-जंतुओं और वनस्पतियों में ऊर्जा के स्त्रोत हैं। सूर्य देव के प्रकाश से ही पृथ्वी का अंधकार दूर होता है और सृष्टि में प्राण शक्ति प्रवाहित होती है।
सूर्य देव की दो पत्नियां हैं। एक पत्नी का नाम संज्ञा और दूसरी पत्नी का नाम छाया है। इनके अनेकों पुत्रों में यम और शनि तथा कन्याओं में यमुना और भद्रा श्रेष्ठ और तपस्वी हैं जिनमें यम को मरणोपरांत जीव को दंड देने का अधिकार और शनि, भद्रा को जीवलोक में ही दंड देने का अधिकार प्राप्त हैं। किसी भी जातक की जन्मकुंडली में अकेले सूर्य ही बलवान हों तो सभी ग्रहों का दोष शमन कर देते हैं।
ज्योतिष में सूर्य का महत्व
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह का विशेष महत्व होता है और सूर्य को तारों का जनक माना जाता है। सौर मंडल में सूर्य केंद्र में मौजूद है। कुंडली के अध्ययन में सूर्य का खास महत्व होता है, हालांकि खगोल शास्त्र के अनुसार सूर्य एक तारा है। सूर्य को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे- आदित्य, रवि, भास्कर, अर्क, अरुण, भानु और दिनकर आदि। ज्योतिष में सूर्य देवता को पूर्व दिशा का स्वामी माना जाता है। तांबे और सोने का स्वामी सूर्य देव होते हैं। जन्म कुंडली में सूर्य पिता का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुंडली में सूर्य के मजबूत होने की स्थिति में व्यक्ति को उच्च पद और राजकीय सुख की प्राप्ति होती है। सूर्य सिंह राशि के स्वामी होते हैं, मेष राशि में सूर्य देव उच्च के होते हैं और तुला राशि में सूर्य नीच के होते हैं।
सात घोड़ों के रथ पर सवार हैं भगवान सूर्य
सृष्टि के प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य के रथ में सात घोड़े होते हैं, जिन्हे शक्ति एवं स्फूर्ति का प्रतीक माना जाता है। भगवान सूर्य का रथ यह प्रेरणा देता है कि हमें अच्छे कार्य करते हुए सदैव आगे बढ़ते रहना चाहिए, तभी जीवन में सफलता मिलती है।
सूर्य उपासना के नियम
- सूर्योदय होने के 1 घंटे के अंदर सूर्य देव को जल अर्पित करना शुभ होता है। इस समय सूर्यदेव को अर्घ्य देने पर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सूर्यदेव को सुबह 08 बजे तक जल अर्पित कर देना चाहिए।
- सूर्यदेव को जल अर्पित करते समय सफेद या लाल वस्त्रों को धारण करना शुभ माना जाता है।
- हमेशा सूर्यदेव को जल अर्पित करते समय जल के साथ पुष्प और अक्षत जरूर डालें। इससे सूर्यदेव जल्द प्रसन्न होते हैं।
- सूर्य देव को जल अर्पित करते समय पूर्व दिशा में मुख करना चाहिए।
- सूर्य उपासना के दौरान हमेशा तांबे, पीतल या कांसे के बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए।
- भूलकर भी सूर्यदेव को कभी शीशे, प्लास्टिक और चांदी के पात्रों में जल अर्पित करना चाहिए।
- छात्रों के लिए सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है। इससे अध्ययन में सहायता मिलती है।
- हमेशा अपनी पिता का सम्मान करना चाहिए क्योंकि सूर्य पिता के कारक हैं।
- सूर्य देव को एक ही पात्र से तीन बार जल अर्पित करना चाहिए और जल चढ़ाने के बाद खड़े होकर एक परिक्रमा करते हुए मंत्रोच्चार करना चाहिए।
- रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य की साधना-आराधना करने पर शीघ्र ही उनकी कृपा प्राप्त होती है।
सूर्य देव को प्रसन्न करने के मंत्र
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।
ॐ घृणि सूर्याय नमः।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पतेए अनुकंपयेमां भक्त्याए गृहाणार्घय दिवाकररू।।
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।।