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जगन्नाथ जी के प्रसाद को सबसे पहले कौन चखता है?
पं जयगोविन्द शास्त्री/ज्योतिषशास्त्री
Updated Fri, 11 Dec 2015 06:54 PM IST
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भुवनेश्वर (ओडिशा) से लगभग 60 किलोमीटर दूर जगन्नाथपुरी मंदिर चार धामों में प्रमुख है। इस विश्वविख्यात मंदिर में जगन्नाथ जी, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र जी के साथ विराजमान हैं।
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कलिंग शैली में बना यह मंदिर नक्काशियों और वास्तुकला का बेजोड़ उदाहरण है। जगन्नाथ मंदिर समुद्रतट से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित है। सागर में अस्त होते सूर्य के दर्शन कर जगन्नाथ जी की आरती में शामिल होना एक पवित्र अनुभव से गुजरना है।
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यहां भोजन-भंडारे की अद्भुत व्यवस्था रहती हैं जिसमे हजारों श्रद्धालु एकसाथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर प्रांगण में ही विमला देवी शक्तिपीठ है। यह शक्तिपीठ बहुत प्राचीन मनि जाति का है। शक्ति स्वरुपिणि माँ विमला देवी भगवान श्री जगन्नाथ जी के लिए बनाए गए नैवेद्य को पहले चखती हैं फिर वह भोग के लिए चढ़ाया जाता है।
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मंदिर की विशेषता है कि हिंदू धर्म में विश्वास रखने वाले सभी वर्गों, जातियों और संप्रदाय के लोगों को प्रवेश की आज्ञा है। लेकिन भारत के बाहर से आने वाले लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता है। वे लोग अगर भारत मूल के हों तो अलग बात है वरना मंदिर के ध्वज के दर्शन करके लौट आते हैं।