आज गीता पाठ से मिलेगा महापुण्य

राकेश/इंटरनेट डेस्क। Updated Sat, 22 Dec 2012 06:30 PM IST
srimad bhagavad gita jyanti
आज मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी है। इसे शास्त्रों में मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है क्योंकि इस एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा एवं दान करने से व्यक्ति मोक्ष का अधिकारी बनता है। इस एकादशी का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन का मोह भंग करने के लिए मोक्ष प्रदायिनी श्रीमद्भगवद्गीता का अपदेश दिया था। इसलिए इस दिन को गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता में अठारह अध्याय हैं। गीता के ग्यारहवां अध्याय में भगवान श्री कृष्ण के द्वारा अर्जुन को विश्वरूप के दर्शन का वर्णन किया गया है। इस अध्याय में बताया गया है कि अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण को संपूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त देखा। श्री कृष्ण में ही अर्जुन ने भगवान शिव, ब्रह्मा एवं जीवन मृत्यु के चक्र को भी देखा।

शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति नियमित गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करता है उसे भगवान विष्णु के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्ति की आत्मा मृत्यु के पश्चात परमात्मा के स्वरूप में विलीन हो जाती है अर्थात उन्हें मोक्ष मिल जाता है।

गीता का अठारवां अध्याय मोक्ष सन्यास योग के नाम से जाना जाता है। जो व्यक्ति समय के अभाव में संपूर्ण गीता का पाठ नहीं कर पाता हैं वह केवल अठारवें अध्याय का पाठ करें तो उन्हें संपूर्ण गीता पाठ का लाभ मिल जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि गीता जयंती के दिन श्रीमद्भगवद्गीता की पूजा करके आरती करनी चाहिए इसके पश्चात गीता का पाठ करना चाहिए। इससे महापुण्य की प्राप्त होती है।

गीता पाठ का पुण्य प्राप्त करने के लिए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गीता मनुष्य को आदर्श जीवन जीने की सलाह देता है। व्यक्ति को गीता का पाठ करके इसके ज्ञान को अपने जीवन में भी अपनाना चाहिए। तभी गीता के पाठ का लाभ मिलता है।

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