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Gopal Chalisa: घर में रखें हैं लड्डू गोपाल ? तो इस चालीसा का जरूर करें पाठ, हर मनोकामना होगी पूरी

Fri, 13 Dec 2024 04:03 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Fri, 13 Dec 2024 04:03 PM IST
सार

Shri Laddu Gopal Chalisa: हिंदू धर्म में रोजाना भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है, उन्हें धैर्य, करुणा और प्रेम का प्रतीक माना गया है।

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Shri Laddu Gopal Chalisha in Hindi Krishna Chalisa Niyam To Ful fill all Wishes
Shri Laddu Gopal Chalisha in Hindi - फोटो : freepik

विस्तार

Shri Laddu Gopal Chalisa: हिंदू धर्म में रोजाना भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है, उन्हें धैर्य, करुणा और प्रेम का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि आराधना से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, साथ ही संतान सुख की प्राप्ति होती हैं। आमतौर पर घरों में श्रीकृष्ण के बाल रूप को रखा जाता है, जिन्हें लड्डू गोपाल कहते हैं।

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कहते हैं कि घर में लड्डू गोपाल रखने पर कई नियमों का पालन किया जाता है। यदि आप घर में लड्डू गोपाल को रखते हैं, तो उनकी देखरेख एक बच्चे के सामान की जाती है। बाल गोपाल को बच्चों की तरह रोजाना स्नान कराया जाता है, जिसके बाद कुंडल, मुरली, वस्त्र और जेवर से उनका श्रृंगार होता है। इस दौरान चंदन का टीका अवश्य लगाना चाहिए, क्योंकि यह उन्हें अति प्रिय है। लड्डू गोपाल की पूजा के समय गोपाल चालीसा का पाठ भी जरूर करें, इससे वह प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना पूरी करते हैं। ऐसे में आइए इस चालीसा के बारे में जानते हैं।

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|| श्री गोपाल चालीसा ||

| | दोहा | |
श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कूल |
वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल | |

| | चौपाई | |
जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी, दुष्ट दलन लीला अवतारी |
जो कोई तुम्हरी लीला गावै, बिन श्रम सकल पदारथ पावै |

श्री वसुदेव देवकी माता, प्रकट भये संग हलधर भ्राता |
मथुरा सों प्रभु गोकुल आये, नन्द भवन मे बजत बधाये |

जो विष देन पूतना आई, सो मुक्ति दै धाम पठाई |
तृणावर्त राक्षस संहारयौ, पग बढ़ाय सकटासुर मार्यौ |

खेल खेल में माटी खाई, मुख मे सब जग दियो दिखाई |
गोपिन घर घर माखन खायो, जसुमति बाल केलि सुख पायो |

ऊखल सों निज अंग बँधाई, यमलार्जुन जड़ योनि छुड़ाई |
बका असुर की चोंच विदारी, विकट अघासुर दियो सँहारी |

ब्रह्मा बालक वत्स चुराये, मोहन को मोहन हित आये |
बाल वत्स सब बने मुरारी, ब्रह्मा विनय करी तब भारी |

काली नाग नाथि भगवाना, दावानल को कीन्हों पाना |
सखन संग खेलत सुख पायो, श्रीदामा निज कन्ध चढ़ायो |

चीर हरन करि सीख सिखाई, नख पर गिरवर लियो उठाई |
दरश यज्ञ पत्निन को दीन्हों, राधा प्रेम सुधा सुख लीन्हों |

नन्दहिं वरुण लोक सों लाये, ग्वालन को निज लोक दिखाये |
शरद चन्द्र लखि वेणु बजाई, अति सुख दीन्हों रास रचाई |

अजगर सों पितु चरण छुड़ायो, शंखचूड़ को मूड़ गिरायो |
हने अरिष्टा सुर अरु केशी, व्योमासुर मार्यो छल वेषी |

व्याकुल ब्रज तजि मथुरा आये, मारि कंस यदुवंश बसाये |
मात पिता की बन्दि छुड़ाई, सान्दीपन गृह विघा पाई |

पुनि पठयौ ब्रज ऊधौ ज्ञानी, पे्रम देखि सुधि सकल भुलानी |
कीन्हीं कुबरी सुन्दर नारी, हरि लाये रुक्मिणि सुकुमारी |

भौमासुर हनि भक्त छुड़ाये, सुरन जीति सुरतरु महि लाये |
दन्तवक्र शिशुपाल संहारे, खग मृग नृग अरु बधिक उधारे |

दीन सुदामा धनपति कीन्हों, पारथ रथ सारथि यश लीन्हों |
गीता ज्ञान सिखावन हारे, अर्जुन मोह मिटावन हारे |

केला भक्त बिदुर घर पायो, युद्ध महाभारत रचवायो |
द्रुपद सुता को चीर बढ़ायो, गर्भ परीक्षित जरत बचायो |

कच्छ मच्छ वाराह अहीशा, बावन कल्की बुद्धि मुनीशा |
ह्वै नृसिंह प्रह्लाद उबार्यो, राम रुप धरि रावण मार्यो |

जय मधु कैटभ दैत्य हनैया, अम्बरीय प्रिय चक्र धरैया |
ब्याध अजामिल दीन्हें तारी, शबरी अरु गणिका सी नारी |

गरुड़ासन गज फन्द निकन्दन, देहु दरश धु्रव नयनानन्दन |
देहु शुद्ध सन्तन कर सग्ड़ा, बाढ़ै प्रेम भक्ति रस रग्ड़ा |

देहु दिव्य वृन्दावन बासा, छूटै मृग तृष्णा जग आशा |
तुम्हरो ध्यान धरत शिव नारद, शुक सनकादिक ब्रह्म विशारद |

जय जय राधारमण कृपाला, हरण सकल संकट भ्रम जाला |
बिनसैं बिघन रोग दुःख भारी, जो सुमरैं जगपति गिरधारी |

जो सत बार पढ़ै चालीसा, देहि सकल बाँछित फल शीशा |

| | छन्द | |
गोपाल चालीसा पढ़ै नित, नेम सों चित्त लावई |
सो दिव्य तन धरि अन्त महँ, गोलोक धाम सिधावई | |

संसार सुख सम्पत्ति सकल, जो भक्तजन सन महँ चहैं |
ट्टजयरामदेव' सदैव सो, गुरुदेव दाया सों लहैं | |
 
| | दोहा | |
प्रणत पाल अशरण शरण, करुणा-सिन्धु ब्रजेश |
चालीसा के संग मोहि, अपनावहु प्राणेश | |

 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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