फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Shani Sade Sati Upay Astro Remedies on Saturday to Reduce the Effects of Shani Sade Sati

Shani Sade Sati: इन तीन राशि के लोगों पर साढ़ेसाती का साया, प्रभाव से बचने के लिए करें ये एक उपाय

Fri, 02 May 2025 01:21 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा कुमारी Updated Fri, 02 May 2025 01:21 PM IST
सार

ज्योतिषियों के मुताबिक शनि का साढ़ेसाती होने पर व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। इतना ही नहीं व्यक्तिगत जीवन में भी कई बदलाव आते हैं और कार्य में बार-बार रुकावटें भी आने लगती हैं। 

विज्ञापन
Shani Sade Sati Upay Astro Remedies on Saturday to Reduce the Effects of Shani Sade Sati
Shani Sade Sat - फोटो : adobe stock

विस्तार

Shani Sade Sati: ज्योतिष शास्त्र में जहां सभी ग्रहों का विशेष महत्व है, वहीं शनि अपने खास प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। वह व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्म के आधार पर फल प्रदान करते हैं, इसलिए उन्हें न्याय का देवता कहा जाता है। शनि सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं और वह लगभग ढाई साल बाद राशि परिवर्तन करते हैं।

विज्ञापन

हाल ही में यह संयोग 29 मार्च 2025 के दिन बना, जब शनि ने कुंभ से निकलकर मीन राशि में प्रवेश किया। शनि के राशि परिवर्तन करने पर कुंभ, मेष और मीन राशि के लोगों पर साढ़ेसाती का साया शुरू हो गया। इस दौरान मेष पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण, मीन वालों पर दूसरा और कुंभ राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है।

विज्ञापन

 

ज्योतिषियों के मुताबिक शनि का साढ़ेसाती होने पर व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। इतना ही नहीं व्यक्तिगत जीवन में भी कई बदलाव आते हैं और कार्य में बार-बार रुकावटें भी आने लगती हैं। ऐसे में शनिवार को शनि देव की पूजा करना लाभकारी माना जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना के साथ-साथ शनि चालीसा का पाठ करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं, जिससे साढे़साती के प्रभाव में कमी आ सकती हैं। आइए इस शक्तिशाली चालीसा के बारे में जानते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

शनि चालीसा

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥


चौपाई

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥


परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥


कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥


सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥


पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥


बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥


रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥


नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥


भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥


हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥


श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥


पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥


रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥


वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥


गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥


जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥


तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥


समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥


अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥


पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

Astro Tips: इन उपायों को करने से पूरे होंगे सभी बिगड़े काम, मिलेगी तरक्की

दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

Importance Of Shankh: शंख के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है लक्ष्मी नारायण की पूजा, जानें क्या है इसका महत्व

Wedding Invitation: सबसे पहले किन्हें देना चाहिए शादी का निमंत्रण कार्ड? जानें क्या कहते हैं नियम

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed