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सावन का महीना आते ही इस गांव में छा जाती है शोक की लहर
मयंक तिवारी/गुड़गांव ब्यूरो
Updated Sun, 04 Aug 2013 07:32 AM IST
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पिछले तीन वर्षों से हरियाणा के गुडग़ांव जिले के बाघनकी गांव में सावन का महीना शोक की लहर लेकर आ रहा है। इस महीने न तो शिव के जयकारे गूंजते हैं और न ही यहां से कोई कांवड़ लाने जाता है। गांव के शिव मंदिर में भी लोगों ने आना छोड़ दिया है।
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साफ-सफाई के अभाव में मंदिर में घास फूस उग आए हैं। इन सबके पीछे है उत्तरकाशी में घटी एक घटना है। इस गांव के 19 एवं पास के गांव के पांच युवक बड़े ही उत्साह और श्रद्घा से कांवड़ में जल भरने गंगोत्री की यात्रा पर निकले। उत्तर काशी के पास कांवड़ियों को ले जा रहा ट्रक हादसे का शिकार हो गया और इसमें सवार सभी कांवड़िए काल के गाल में समा गए।
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यह घटना 29 जुलाई की है। 3 अगस्त को एक साथ 24 युवा कांवडिय़ों का शव जब गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। वह दिन था और आज का दिन है। सावन आते ही गांव का माहौल गमगीन हो जाता है। ग्रामीण गजराज कौशिक बताते हैं कि इस हादसे के बाद से गांव के लोगों ने शिव की अराधाना छोड़ दी है। यहां तक कि गांव के शिव मंदिर में अब कोई नहीं जाता।
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महिलाओं ने भी महाशिवरात्रि का व्रत रखना छोड़ दिया है। मंदिर के पूजारी झुत्तर सिंह गोसाईं भी अब यदा कदा ही आते हैं। गांव के लालचंद बताते हैं कि हादसे से पहले यहां मरम्मत कार्य चल रहा था। उसे भी बंद कर दिया गया। पिछले साल सावन आने पर मंदिर के दरवाजे पर ताला लगा दिया गया था। इस बार ताला तो नहीं लगाया गया है, पर साफ-सफाई के अभाव में मंदिर परिसर में खर-पतवार उग आए हैं।