Sawan 2021 LIVE ज्योतिर्लिंग दर्शन: सावन में घर बैठे करें महाकाल, बाबा विश्वनाथ सहित अन्य शिवधामों के लाइव दर्शन
सावन के इस पावन माह में कोरोना संक्रमण को देखते हुए शिवधामों में लाइव दर्शन की व्यवस्था की गई है जिसकी मदद से शिवभक्त घर बैठे भगवान भोलेनाथ का दर्शन कर सकेंगे।
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सावन का पावन महीना शुरू हो चुका है। यह भगवान शिव का प्रिय मास है। इस माह में उनकी विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना और दर्शन करने से भक्तों की सारी मुरादें पूरी होती हैं। इसलिए श्रावण माह में हजारों लाखों भक्त भारत के अलग-अलग राज्यों में स्थित शिवधामों के दर्शन करने जाते हैं। इनमें 12 ज्योतिर्लिंग प्रमुख हैं। इस बार भी कोरोना संक्रमण के चलते शिव के पावन धामों में भक्तों की भीड़ नहीं देखने को मिलेगी। लेकिन भक्त अपने घर बैठकर भी पावन ज्योतिर्लिंगों के लाइव दर्शन कर भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। जैसे बाबा महाकाल के ऑनलाइन दर्शन करने के लिए mahakaleshwar.nic.in पर विजिट करना होगा। यहां आप महाकालेश्वर मंदिर के भी लाइव दर्शन कर सकेंगे। इसी प्रकार आप अन्य ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी घर बैठकर कर सकेंगे।
महाकालेश्वर
मध्य प्रदेश स्थित सप्तपुरियों में से एक प्राचीन उज्जैन नगरी में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। जिनकी साधना-आराधना से जीवन से जुड़ी सभी प्रकार के भय दूर होते हैं। मान्यता है कि यहां पर शिव की साधना करने वाले साधक का काल भी कुछ नहीं कर पाता। यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्मारती विश्व भर में प्रसिद्ध है।
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ओंकारेश्वर
मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में शिव का यह पावन धाम स्थित है। इंदौर शहर के पास जिस स्थान पर यह ज्योतिर्लिंग है, उस स्थान पर नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ॐ का आकार बनता है। मान्यता है कि व्यक्ति इस पावन तीर्थ में पहुंचकर अन्नदान, तप, पूजा आदि करता है, वह सभी सुख को भोगते हुए शिवलोक में स्थान प्राप्त होता है।
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काशी विश्वनाथ
बाबा विश्वनाथ का यह ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी शहर में स्थित है। मान्यता है कि प्रलय आने पर जब सारी धरती के डूब जाने के बावजूद यह स्थान बना रहता है क्योंकि इसकी रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं। प्रलय के समय भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं।
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सोमनाथ
गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। शिवपुराण के अनुसार जब चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने क्षय रोग होने का श्राप दे दिया था, तब चंद्रदेव इसी स्थान पर तपस्या करके श्राप से मुक्त हुए थे। मान्यता है कि शिव के इस पावन धाम पर पूजा करने से साधक के क्षय, कोढ़ आदि रोग दूर हो जाते हैं। यहां पर देवताओं द्वारा बनवाया गया एक पवित्र कुण्ड भी है, जिसे सोमकुण्ड या पापनाशक-तीर्थ कहते हैं।
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