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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग: दर्शन से मिलता है मोक्ष और मिट जाते हैं सारे पाप

Wed, 07 Aug 2019 02:19 PM IST
कशिश मिश्रा अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: कशिश मिश्रा Updated Wed, 07 Aug 2019 02:19 PM IST
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sawan 2019 bhimashankar jyotirling in maharastra
भीमशंकर महादेव

शिवपुराण के अनुसार महाप्रभु शम्भु के 12 ज्योतिर्लिंग है। जिनमें से भीमाशंकर छठा ज्योतिर्लिंग माना जाता है।सब दुखों को हरने वाला यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे से लगभग110 कि.मी.दूर भीमा नदी के तट पर सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है।इस अवतार में भोलेनाथ ने बड़ी-बड़ी लीलाएं की हैं एवं लोकहित की कामना से साक्षात भगवान शंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में अवतीर्ण हुए थे।उनका यह स्वरूप सभी प्राणियों के लिए कल्याण और सुख का आश्रय है।

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कहलाते हैं मोटेश्वर महादेव
भीमा शंकर मंदिर नागर शैली की वास्तुकला से बना एक भव्य मंदिर है ।जिसमें प्राचीनता के साथ-साथ आधुनिक शैली का भी समावेश है।यह मंदिर लगभग 3 ,250 फ़ीट की ऊंचाई पर है ।शिवलिंग का आकर मोटा होने के कारण भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है ।भीमा शंकर मंदिर के पास कमलजा मंदिर है,जो माँ पार्वतीजी का ही अवतार है।माँ पार्वती का आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए इस मंदिर में भक्तों की लम्बी कतार लगी रहती है।
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भीम को मारकर शिव हुए भीमाशंकर
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का उल्लेख "शिवपुराण" में मिलता है। शिवपुराण की कथा के अनुसार, रावण के भाई कुम्भकरण का एक पुत्र था जिसका नाम भीम था।भीम का जन्म उसके पिता की मृत्यु के बाद हुआ था, उसकी माता जंगलों में रहती थी।भीम जब बड़ा हुआ तो उसने एक दिन अपनी माता से अपने पिता के बारे में पूछा। तब उसकी माता ने बताया कि कुम्भकरण उसके पिता थे, जिन्हें  युद्ध में श्री राम ने मार डाला। अपने पिता की मृत्यु के बारे में सुनकर भीम अत्यंत क्रोधित हुआ और उसने श्री राम से प्रतिशोध लेने की ठान ली। बाद में उसे पता चला की रामजी ही श्री हरी विष्णु के ही अवतार हैं, इससे उसके मन में श्री विष्णु के लिए द्वेष आ गया। उसने ब्रह्माजी की तपस्या की और उनसे अभय वरदान प्राप्त किया। शक्ति आते ही वह निरंकुश हो गया, उसने सारी पृथ्वी पर हाहाकार मचा दिया और अंत में स्वर्ग पर भी आक्रमण कर उस पर अपना अधिकार कर लिया।सभी देवता त्रस्त होकर शिवजी की शरण में गए और उनसे उस राक्षस का वध करने की प्रार्थना की। शिवजी ने देवताओं को निश्चिन्त रहने के लिए कहा, और उन्हें बताया कि उसकी मृत्यु का सही समय आने पर वो उसे मार देंगे।इधर भीम ने पृथ्वी पर किसी भी देवता की पूजा पर रोक लगा दी, और जो उसकी आज्ञा नहीं मानता था वो उसको मार डालता था। एक दिन उसने एक राजा के राज्य पर आक्रमण किया , वह राजा शिवजी का अनन्य भक्त था।भीम ने उसे परास्त कर कारागार में डलवा दिया और शिव की भक्ति छोड़ उसकी पूजा करने के लिए कहा। किन्तु राजा को अपने इष्ट पर पूर्ण विश्वास था,उन्होंने शिवजी की पूजा नहीं छोड़ी और कारागार में ही मिट्टी से शिवलिंग बना उसकी पूजा शुरू कर दी। जब भीम को यह पता लगा तो वह तलवार से उस शिवलिंग को नष्ट करने आ गया। जैसे ही उसने तलवार शिवलिंग पर मारी शिवजी वहां प्रकट हो गए और उन्होंने अपने पिनाक से उस अधर्मी को मार दिया और राजा को अपना आशीर्वाद दिया। सभी देवताओं ने शिवजी से प्रार्थना की कि उस अपवित्र जगह को पवित्र करने के लिए वहीं स्थापित हो जाएँ। देवताओं का आग्रह मान शिवजी ने अपनी ज्योति वहा उस शिवलिंग में स्थापित कर दी। चूँकि शिवजी ने भीम को मार कर उसका उद्धार किया था, इसलिए उस ज्योतिर्लिंग को भीमाशंकर कहा जाने लगा।

 दर्शन से होते हैं पाप दूर
मान्यता है कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से व्यक्ति को समस्त दुखों से छुटकारा मिल जाता है।जो भक्त श्रद्धा से इस मंदिर के प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद दर्शन करता है,उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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