{"_id":"f76f0754-2b0b-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"santan-laxmi-mata","type":"story","status":"publish","title_hn":"संतान लक्ष्मी माता ","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
संतान लक्ष्मी माता
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Sat, 10 Nov 2012 01:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संतान लक्ष्मी माता की छह भुजाएं हैं। ऊपर के दोनों हाथों में कलश है जिसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल है। बीच के दोनों हाथों में क्रमशः तलवार और ढाल है। नीचे के एक हाथ को माता ने अभय मुद्रा में रखा है और दूसरे हाथ से गोद में बैठे अपने बालक को माता ने थाम कर रखा है। संतान लक्ष्मी मां लक्ष्मी का ममतामयी रूप है।
इस स्वरूप में माता यह बताती हैं कि वह अपने बच्चों का स्नेह पूर्वक ध्यान रखती हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति संतान लक्ष्मी की पूजा आराधना करता है मां उसे योग्य संतान का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। संतान लक्ष्मी माता का स्वस्वरूप देवी स्कंदमाता के समान ही प्रेमपूर्ण है।
विज्ञापन
इस स्वरूप में माता यह बताती हैं कि वह अपने बच्चों का स्नेह पूर्वक ध्यान रखती हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति संतान लक्ष्मी की पूजा आराधना करता है मां उसे योग्य संतान का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। संतान लक्ष्मी माता का स्वस्वरूप देवी स्कंदमाता के समान ही प्रेमपूर्ण है।
विज्ञापन