ब्रज भूमि का एक पठान जो बन गया कृष्ण भक्ति की खान

टीम डिजिटल Updated Mon, 25 Nov 2013 03:50 PM IST
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कहते हैं भगवान को जो भजता है भगवान उसके हो जाते हैं, भगवान किसी एक जाति या संप्रदाय के बंधन में नहीं बंधे हुए हैं।
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ब्रजभूमि में इसके कई उदाहरण मौजूद हैं, मुसलान होते हुए भी ताज बीबी ने अपनी भक्ति से कृष्ण के दर्शन प्राप्त किए।
इसी प्रकार एक पठान के लड़के को एक वैष्णव संत ने कह दिया कि एक लड़के के पीछे तुम इतने दीवाने हुए जाते हो। अगर ऐसी भक्ति प्रभु से होती तो तुम्हारा काम बन जाता है।
पठान बालक ने संत से पूछा प्रभु कौन हैं? संत ने बताया कि जिनकी सब विभूति हैं वह हैं प्रभु। ब्रज में प्रभु निवास करते हैं।

इसके बाद संत ने बालक को श्री कृष्ण की एक तस्वीर दी। इस तस्वीर को देखते ही बालक श्री कृष्ण की भक्ति में डूब गया।

एक दिन श्री नाथ जी के दर्शन के लिए वह बालक गिरिराज गए। श्री नाथ जी के मंदिर में जाने लगे तो इन्हें धक्का मार कर यहां से भगा दिया गया।

दुःखी होकर वे गोविंद कुण्ड के पास जाकर बैठ गया और तीन दिनों तक लगातार टकटकी लगाकर श्री नाथ जी के मंदिर की ओर देखते रहे।

श्री नाथ जी अपने भक्त की और परीक्षा नहीं ले सकते थे सो प्रकट हो गए। इनके दर्शन पाते ही बालक भक्ति रस में झूमने लगा और संसार में रस की खान रसखान के नाम से प्रसिद्घ हो गया। संत विट्ठलनाथ जी रसखान के गुरु हुए।

85 वर्ष की अवस्था में परलोक जाने से पहले रसखान ने कई दोहे और छंदों की रचना की जो आज भी लोक प्रसिद्घ है।

गोकुल महावन मार्ग में रसखान की समाधि आज भी श्री कृष्ण की अनूठी भक्ति की कथा सुना रही है। और कहती है श्री कृष्ण सबके हैं, इनके लिए जात-पात का कोई भेद-भाव नहीं है।
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