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रामलीलाः ऐसा देवर जिसने चेहरा नहीं सिर्फ भाभी के पांव देखे
टीम डिजिटल
Updated Mon, 07 Oct 2013 12:54 PM IST
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आज की रामलीला में भगवान राम के वन गमन के प्रंसंग पर बात करते हैं। भगवान राम के विवाह के बाद राम के जीवन में तीसरी बड़ी घटना है राम का लक्ष्मण और सीता के साथ वन जाना। वन में सीता राम और लक्ष्मण के बीच उस प्रकार रह रही हैं जैसे ब्रह्म और जीव के बीच माया रहती है। लेकिन मारिच की माया के जाल में सीता फंस जाती हैं और राम से स्वर्ग मृग लाने के हठ करती हैं।
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राम मृग का शिकार करने मृग के पीछे-पीछे भागते हैं अंत में राम के सधे हुए वाण से सोने का मृग घायल हो जाता है और लक्ष्मण को पुकारता है। राम पर आई विपत्ति जानकर सीता लक्ष्मण को वन में जाकर राम की सुध लेने की जिद्द करती हैं। लक्ष्मण को भाभी की आज्ञा पालन करने के लिए वन में जाना पड़ता है लेकिन जाते-जाते लक्ष्मण एक सीमा रेखा बनाकर जाते हैं और भाभी से आग्रह करते हैं कि वह इस रेखा को किसी भी हाल में पार न करें।
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लक्ष्मण के जाने के बाद रावण साधु के वेष में भिक्षा मांगने आता है। सीता सीमा रेखा में रहकर भिक्षा देने का प्रयास करती है लेकिन रावण सीमा रेखा से निकलकर भिक्षा देने का आग्रह करता है। साधु के रूप में रावण को सीता पहचान नहीं पाती है और सीमा रेखा पार कर जाती है। मौके की ताक में बैठा रावण सीता को पकड़कर अपने पुष्पक विमान में बैठाकर लंका लेकर विदा हो जाता है।
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रामायण में सीता का सीमा रेखा पार करना संसार के लिए एक उदाहरण है कि मर्यादा की रेखा का किसी भी हाल में उल्लंघन नहीं करना चाहिए। साधु के रूप में शैतान भी हो सकता है इसलिए साधु के पास भी रहें तो मर्यादा रेखा का ध्यान रखें। वर्तमान समय में यह बात काफी प्रासंगिक भी है क्योंकि बहुत से शैतान इन दिनों साधु का मुखौटा लगाए फिर रहे हैं, इसलिए सावधान रहने की बहुत जरूरत है।
राम और लक्ष्मण जब वापस कुटिया में आते हैं तब सीता को कुटी में नहीं पाकर किसी अनहोनी से आशंकित हो जाते हैं। सीता की तलाश करते हुए एक स्थान पर राम को सीता के कुछ आभूषण मिले। राम ने उन आभूषणों में से कर्णफूल को दिखाकर लक्ष्मण से पूछा कि यह तो सीता के कर्णफूल हैं लेकिन यह घने वन में कैसे आए।
इस पर लक्ष्मण ने कहा कि हे भाईया राम कर्णफूल भाभी के ही हैं यह मैं कैसे बता सकता हूं, मैंने तो कभी भाभी के मुख की ओर देखा ही नहीं। मैं तो सेवक और पुत्र भाव से सदा भाभी के चरणों को देखा है इसलिए मैं सिर्फ उनकी पायल को पहचानता हूं।
लक्ष्मण की इन बातों को सुनकर राम सीता के न होने के कारण दुःखी थे वहीं लक्ष्मण के प्रति अपार प्रेम और आदर भाव से आनंदित हो गए।
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