राम ने रावण को कितने मौके दिए?

स्वामी रामनरेशाचार्य Updated Fri, 12 Jan 2018 12:00 PM IST
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रावण ने सीता माता का अपहरण कर लिया। तब भी राम ने हनुमान को भेजा, अंगद को भेजा, विभीषण, कुंभकर्ण और यहां तक कि पुलस्त्य को भी प्रेरित किया कि वह रावण को सुधरने के लिए समझाएं, ताकि रावण रास्ते पर आ जाए। राम ने रावण को पूरे मौके दिए। वह प्रतिशोध भावना के कारण अमर्यादित नहीं हुए।
रावण के ही कुटुंब के लोगों ने समझाया कि राम को उनकी धर्म पत्नी लौटा दो, लेकिन जब रावण किसी तरह नहीं माना, तब राम जी ने विधिवत घोषित युद्ध का सहारा लिया। राम ने अमर्यादित व दुष्ट रावण को भी दंड देने के लिए युद्ध की तमाम मर्यादाओं का पालन किया। आक्रमण का वह तरीका नहीं था, जो आज दंगों के समय देखने को मिलता है। युद्ध जीतने के बाद भी राम जी की सेना ने लंका में घुसकर कोई उत्पात नहीं मचाया। निर्दोष लोगों को नहीं मारा। लूटमार, हत्या या बलात्कार का सहारा नहीं लिया। जैसा कि आजकल होता है। यदि सड़क पर खुलेआम अन्याय होगा, तो राम राज्य कैसे आएगा? 

प्रतिशोध के लिए और श्रेष्ठ मूल्यों की स्थापना के लिए उन कृत्यों की जरूरत नहीं है, जिन कृत्यों की हम निंदा करते हैं। रावण जैसी तानाशाही ठीक  नहीं है।  जब देश स्वतंत्र हुआ, तब किसी ने गांधी जी से कहा कि देश में तानाशाही की जरूरत है। गांधी जी ने जवाब दिया, ‘यह मैं भी मानता हूं, लेकिन जो लोग दस साल तानाशाही चला लेंगे, वो फिर लोकतंत्र को नहीं आने देंगे।

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