{"_id":"6ab6805330c366e9270392d4","slug":"pitru-paksha-2026-ptarting-pate-first-shradh-tithi-tarpan-muhurat-and-shradh-vidhi-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"कब से शुरू होंगे पितृ पक्ष, कल या परसों ? जानिए श्राद्ध पक्ष की तिथियों का पूरा कैलेंडर और पूजा विधि","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
कब से शुरू होंगे पितृ पक्ष, कल या परसों ? जानिए श्राद्ध पक्ष की तिथियों का पूरा कैलेंडर और पूजा विधि
Fri, 25 Sep 2026 07:39 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 25 Sep 2026 07:39 PM IST
सार
पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है, जो अमावस्या तिथि तक रहता है। पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं।
विज्ञापन
श्राद्ध पक्ष 2026
- फोटो : AI
विस्तार
कल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि है। हिंदू धर्म में इस माह की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। श्राद्ध पक्ष के लिए यह तिथि बहुत ही खास होती है। इस बार कई लोगों के मन में संशय है कि श्राद्ध पक्ष का से शुरू हो रहे हैं और पहले श्राद्ध की तिथि कब है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत शनिवार, 26 सितंबर को हो रही है जिसमें पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाता है, वहीं प्रतिपदा तिथि का पहला श्राद्ध 27 सितंबर को होगा। ऐसे में आइए जानते हैं पहले श्राद्ध की सही तिथि, तर्पण के लिए मुहूर्त और पितरों को प्रसन्न करने के लिए क्या-क्या धार्मिक कार्य किए जाते हैं।
पितृ पक्ष 2026 और पहला श्राद्ध कब
26 सितंबर को भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि है और इस दिन से पितरों के लिए समर्पित पितृपक्ष की शुरुआत होती है। इस दिन से पितरों को श्रद्धा और तर्पण करने का पर्व पितृ पक्ष शुरू होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा पर उन मृत लोगों का श्राद्ध कर्म किया जाता है जिनका निधन किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि हुआ होगा। वहीं आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष का पहला श्राद्ध माना जाता है। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या को होगा।
श्राद्ध पक्ष में कब करें पितरों का तर्पण
श्राद्ध पक्ष के 15 दिन पितरों को समर्पित होते हैं जिसमें पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और इससे संबंधित दूसरे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार पितरों से जुड़े कर्म के लिए दोपहर का समय शुभ माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान करीब दोपहर 12 बजे पितरों को श्रद्धा से धर्म-कर्म करते हैं। दोपहर का समय पितरों का समय माना गया है।
विज्ञापन
- कुतुप मुहूर्त: 11:48 से 12:36
- रौहिण मुहूर्त: 12:36 से 1:24
- अपराह्न काल: 1:24 से 3:48 तक श्रेष्ठ है।
श्राद्ध करने की पूरी विधि
सबसे पहले श्राद्ध पक्ष के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहने, फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करते हुए अपने पितरों को स्मरण करते हुए संकल्प लें। फिर तांबे के लोटे में जल, गंगाजल, कच्चा दूध और तिल मिलाकर हाथ की अनामिका उंगली में कुशा धारण करे पितरों को तीन बार तर्पण दें। पितरों को तर्पण देते हुए तर्पण मंत्र जरूर बोलें- ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिण्यै धीमहि तन्नो पितरो प्रचोदयात्। इसके बाद पिंडदान के लिए पके हुए चावल, काले तिल और शहद से पिंड बनाएं। इसके बाद पंचबलि के लिए जिसमें गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटी के लिए भोजन निकाले और ब्राह्मण को भोजन कराते हुए उन्हे दान-दक्षिणा दें। ऐसी मान्यता है पितृपक्ष में इस विधि से पितरों को तर्पण और श्रद्धा अर्पित करने से भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है और पितरदेव अपने परिजनों को आशीर्वाद देते हैं।
पितृ पक्ष 2026 का पूरा कैलेंडर
विज्ञापन
पितृ पक्ष 2026 और पहला श्राद्ध कब
26 सितंबर को भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि है और इस दिन से पितरों के लिए समर्पित पितृपक्ष की शुरुआत होती है। इस दिन से पितरों को श्रद्धा और तर्पण करने का पर्व पितृ पक्ष शुरू होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा पर उन मृत लोगों का श्राद्ध कर्म किया जाता है जिनका निधन किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि हुआ होगा। वहीं आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष का पहला श्राद्ध माना जाता है। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या को होगा।
विज्ञापन
श्राद्ध पक्ष में कब करें पितरों का तर्पण
श्राद्ध पक्ष के 15 दिन पितरों को समर्पित होते हैं जिसमें पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और इससे संबंधित दूसरे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार पितरों से जुड़े कर्म के लिए दोपहर का समय शुभ माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान करीब दोपहर 12 बजे पितरों को श्रद्धा से धर्म-कर्म करते हैं। दोपहर का समय पितरों का समय माना गया है।
विज्ञापन
- कुतुप मुहूर्त: 11:48 से 12:36
- रौहिण मुहूर्त: 12:36 से 1:24
- अपराह्न काल: 1:24 से 3:48 तक श्रेष्ठ है।
श्राद्ध करने की पूरी विधि
सबसे पहले श्राद्ध पक्ष के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहने, फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करते हुए अपने पितरों को स्मरण करते हुए संकल्प लें। फिर तांबे के लोटे में जल, गंगाजल, कच्चा दूध और तिल मिलाकर हाथ की अनामिका उंगली में कुशा धारण करे पितरों को तीन बार तर्पण दें। पितरों को तर्पण देते हुए तर्पण मंत्र जरूर बोलें- ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिण्यै धीमहि तन्नो पितरो प्रचोदयात्। इसके बाद पिंडदान के लिए पके हुए चावल, काले तिल और शहद से पिंड बनाएं। इसके बाद पंचबलि के लिए जिसमें गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटी के लिए भोजन निकाले और ब्राह्मण को भोजन कराते हुए उन्हे दान-दक्षिणा दें। ऐसी मान्यता है पितृपक्ष में इस विधि से पितरों को तर्पण और श्रद्धा अर्पित करने से भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है और पितरदेव अपने परिजनों को आशीर्वाद देते हैं।
पितृ पक्ष 2026 का पूरा कैलेंडर
|
दिनांक |
वार |
तिथि |
श्राद्ध |
|---|---|---|---|
|
26 सितंबर |
शनिवार |
भाद्रपद पूर्णिमा |
पूर्णिमा श्राद्ध |
|
27 सितंबर |
रविवार |
प्रतिपदा |
प्रतिपदा श्राद्ध |
|
28 सितंबर |
सोमवार |
द्वितीया |
द्वितीया श्राद्ध |
|
29 सितंबर |
मंगलवार |
तृतीया |
तृतीया श्राद्ध |
|
30 सितंबर |
बुधवार |
चतुर्थी |
चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध |
|
1 अक्तूबर |
गुरुवार |
षष्ठी |
षष्ठी श्राद्ध |
|
2 अक्तूबर |
शुक्रवार |
सप्तमी |
सप्तमी श्राद्ध |
|
3 अक्तूबर |
शनिवार |
अष्टमी |
अष्टमी श्राद्ध |
|
4 अक्तूबर |
रविवार |
नवमी |
नवमी श्राद्ध |
|
5 अक्तूबर |
सोमवार |
दशमी |
दशमी श्राद्ध |
|
6 अक्तूबर |
मंगलवार |
एकादशी |
एकादशी श्राद्ध |
|
7 अक्तूबर |
बुधवार |
द्वादशी |
द्वादशी श्राद्ध |
|
8 अक्तूबर |
गुरुवार |
त्रयोदशी |
त्रयोदशी श्राद्ध |
|
9 अक्तूबर |
शुक्रवार |
चतुर्दशी |
चतुर्दशी श्राद्ध |
|
10 अक्तूबर |
शनिवार |
अमावस्या |
सर्वपितृ श्राद्ध |