गणेश उत्सव अब समापन की ओर है। 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी। इस बार गणेश विसर्जन के समय पंचक भी रहेगा। ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पंचक के दौरान गणेश जी का विसर्जन किया जा सकता है और इस अवधि में किन कार्यों को करने से बचना चाहिए। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सितंबर का पंचक 23 सितंबर 2026 की रात से शुरू हुआ है और 28 सितंबर की सुबह तक रहेगा। ऐसे में 25 सितंबर को होने वाला गणेश विसर्जन पंचक की अवधि में ही किया जाएगा।
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Panchak In September 2026
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पंचक क्या होता है?
ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है, तब इस अवधि को पंचक कहा जाता है। यह अवधि सामान्य तौर पर करीब पांच दिनों की होती है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, सभी धार्मिक कार्यों पर पंचक का निषेध लागू नहीं माना जाता।
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सितंबर 2026 में पंचक कब से कब तक रहेगा?
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सितंबर 2026 में पंचक कब से कब तक रहेगा?
सितंबर 2026 में पंचक की शुरुआत 23 सितंबर की रात 9 बजकर 57 मिनट से हुई है। पंचांग के अनुसार पंचक 28 सितंबर की सुबह करीब 10 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस दौरान चंद्रमा पहले कुंभ राशि और उसके बाद मीन राशि में रहेगा। इसी वजह से 25 सितंबर को पड़ने वाली अनंत चतुर्दशी पंचक की अवधि में आएगी।
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पंचक के दौरान पड़ रहे हैं ये खास अवसर
पंचक के दौरान पड़ रहे हैं ये खास अवसर
इस बार पंचक की अवधि में कई महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर भी पड़ रहे हैं। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। इसी दिन गणपति बप्पा के विसर्जन के साथ गणेश उत्सव का समापन होगा। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की भी परंपरा है। इसके अगले दिन यानी 26 सितंबर 2026 से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। ऐसे में सितंबर के आखिरी दिनों में लगातार कई धार्मिक पर्व और अनुष्ठान पड़ रहे हैं।
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गणपति विसर्जन 2025
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क्या पंचक में कर सकते हैं गणेश विसर्जन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने पर सामान्य तौर पर कोई रोक नहीं मानी जाती है। इसलिए इस अवधि में भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जा सकती है और बप्पा के विसर्जन की तैयारी भी की जा सकती है। पंचक में मुख्य रूप से लकड़ी से जुड़े कुछ कार्य, चारपाई बनाना और छत डालने जैसे कामों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की मान्यता है। ऐसे में गणेश विसर्जन को लेकर केवल पंचक होने के कारण पूजा रोकने की आवश्यकता नहीं मानी जाती।