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NMC Logo: मेडिकल काउंसिल के लोगो में भगवान धन्वंतरि की फोटो जोड़ने पर उठा सवाल, जानें कौन हैं धन्वंतरि देव
Fri, 01 Dec 2023 03:50 PM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Fri, 01 Dec 2023 03:50 PM IST
सार
NMC new Logo controversy: लोगो पर हो रहे विवाद पर आयोग ने कहा कि भगवान धन्वंतरि पिछले वर्ष से इसका हिस्सा रहे हैं। बस अब फोटो को ब्लैक एंड व्हाइट की जगह रंगीन कर दिया गया है।
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कौन हैं धन्वंतरि देव? जिनकी फोटो मेडिकल काउंसिल के लोगो में जोड़ने पर हो रहा बवाल
- फोटो : Facebook
विस्तार
Lord Dhanvantari Photo on NMC Logo: हाल ही में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी एनएमसी (NMC) के आधिकारिक लोगो में दो बदलाव किए गए हैं। पहले बदलाव में 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा गया है। वहीं दूसरे बदलाव में आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि की रंगीन फोटो जोड़ी गई है। अब एनएमसी द्वारा लोगो में बदलाव करते ही विवाद शुरू हो गया है। कुछ लोग इस नए लोगो को पसंद कर रहे हैं और सही बता रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहें हैं। हालांकि लोगो पर हो रहे विवाद पर आयोग ने कहा कि भगवान धन्वंतरि पिछले वर्ष से इसका हिस्सा रहे हैं। बस अब फोटो को ब्लैक एंड व्हाइट की जगह रंगीन कर दिया गया है। वहीं रही बात इंडिया की जगह भारत का इस्तेमाल होने की तो यह पूरे देश में हो रहा है, इसलिए यह बदलाव उचित है। ऐसे में इन विवादों के बीच चलिए जानते हैं भगवान धन्वंतरि कौन थे और इनकी पूजा क्यों की जाती है...
कौन हैं धन्वंतरि देव?
पौराणिक कथाओं के अनुसार धन्वंतरि देव का प्रादुर्भाव समुद्र मंथन से हुआ था। इन्हें आयुर्वेद का प्रणेता और चिकित्सा के क्षेत्र में देवताओं के वैद्य के रूप में जाना जाता है। भगवान धन्वंतरि आरोग्यता प्रदान करने वाले देवता माने जाते हैं। कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है व आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
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कहा जाता है कि धन्वंतरी देव ने ही संसार के कल्याण के लिए अमृतमय औषधियों की खोज की थी। इन्होंने दुनिया की तमाम औषधियों के प्रभावों के बारे में धन्वंतरि संहिता लिखा है, जो आयुर्वेद का मूल ग्रंथ है। ऐसी मान्यता है कि महर्षि विश्वामित्र के पुत्र सुश्रुत ने इन्हीं से आयुर्वेदिक चिकित्सा की शिक्षा प्राप्त की थी, जिसके बाद उन्होंने 'सुश्रुत संहिता' की रचना की।
क्यों की जाती है धनतेरस पर धन्वंतरि देव की पूजा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अमृत प्राप्ति के लिए देवताओं और दानवों के द्वारा समुद्र मंथन किया गया था। तब एक-एक करके उससे क्रमशः चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई थी। समुद्र मंथन के बाद सबसे अंत में अमृत की प्राप्ति हुई थी। कथा के अनुसार भगवान धन्वंतरि समुद्र से अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। जिस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए वह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी, इसलिए धनतेरस या धनत्रयोदशी के दिन धन्वंतरि देव के पूजन का विधान है।
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कौन हैं धन्वंतरि देव?
पौराणिक कथाओं के अनुसार धन्वंतरि देव का प्रादुर्भाव समुद्र मंथन से हुआ था। इन्हें आयुर्वेद का प्रणेता और चिकित्सा के क्षेत्र में देवताओं के वैद्य के रूप में जाना जाता है। भगवान धन्वंतरि आरोग्यता प्रदान करने वाले देवता माने जाते हैं। कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है व आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
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कहा जाता है कि धन्वंतरी देव ने ही संसार के कल्याण के लिए अमृतमय औषधियों की खोज की थी। इन्होंने दुनिया की तमाम औषधियों के प्रभावों के बारे में धन्वंतरि संहिता लिखा है, जो आयुर्वेद का मूल ग्रंथ है। ऐसी मान्यता है कि महर्षि विश्वामित्र के पुत्र सुश्रुत ने इन्हीं से आयुर्वेदिक चिकित्सा की शिक्षा प्राप्त की थी, जिसके बाद उन्होंने 'सुश्रुत संहिता' की रचना की।
क्यों की जाती है धनतेरस पर धन्वंतरि देव की पूजा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अमृत प्राप्ति के लिए देवताओं और दानवों के द्वारा समुद्र मंथन किया गया था। तब एक-एक करके उससे क्रमशः चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई थी। समुद्र मंथन के बाद सबसे अंत में अमृत की प्राप्ति हुई थी। कथा के अनुसार भगवान धन्वंतरि समुद्र से अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। जिस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए वह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी, इसलिए धनतेरस या धनत्रयोदशी के दिन धन्वंतरि देव के पूजन का विधान है।