फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   nidhivan where radha krishna meet at night

जहां आज भी रात में मिलते हैं राधा कृष्ण

Tue, 27 Aug 2013 07:40 AM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क
राकेश/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 27 Aug 2013 07:40 AM IST
विज्ञापन
nidhivan where radha krishna meet at night

भगवान श्री कृष्ण और राधा दैवी प्रेम के प्रतीक हैं। नारद मुनि के शाप के कारण इन्हें पृथ्वी लोक में अवतार लेकर वियोग सहना पड़ा। लेकिन इनका यह वियोग लौकिक दुनिया की नजरों का धोखा था। असल में राधा और कृष्ण कभी अलग ही नहीं हुए।

विज्ञापन


राधा हमेशा कृष्ण के हृदय में धड़कन की तरह समाई रहीं और नित इनका मिलन होता रहा। इसका प्रतीक आज भी इस धरती पर मौजूद है जहां हर रात इनकी सेज सजती है और राधा कृष्ण का मिलन होता है।
विज्ञापन


क्यों लगता है भगवान को 56 भोग
विज्ञापन
विज्ञापन


यह स्थान वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर यमुना तट पर बसा निधि वन है। माना जाता है कि यह वही वन है जहां भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला का आयोजन किया था। इस वन में मौजूद वृक्षों को देखकर ऐसा लगता है जैसे मनुष्य नृत्य की मुद्रा में हो।


जनमाष्टमी पर बन रहा है अद्भुत योग, क्या फिर होगा अवतार


मान्यता है कि यह वृक्ष गोपियां हैं जो रात के समय मनुष्य रूप लेकर श्री कृष्ण के साथ रास का आनंद लेती हैं। इस वन की विशेषता है कि शाम ढ़लते ही सभी पशु-पक्षी वन से निकलकर भाग जाते हैं। इस वन के बीचों-बीच एक मंदिर बना हुआ है। मंदिर में हर दिन भगवान की सेज सजाई जाती है और श्रृंगार साम्रगी रख दी जाती है।

मान्यता है कि देवी राधा श्रृंगार सामग्री से अपना श्रृंगार करती हैं और भगवान श्री कृष्ण देवी राधा के साथ सेज पर विश्राम करते हैं। अगले दिन भक्तगण इस श्रृंगार सामग्री और सिंदूर को प्रसाद स्वरूप पाकर अपने आपको धन्य मानते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed