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महाअष्टमी पर कन्याओं को हलवा-पूरी और काले चने खिलाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? जानें धार्मिक मान्यता

Sat, 17 Oct 2026 09:47 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 17 Oct 2026 09:47 PM IST
सार

Navratri 2026: दुर्गाष्टमी पर माता रानी को हलवा-पूरी और काले चने का भोग लगाने की खास परंपरा है। कन्या पूजन के दौरान भी कन्याओं को यही प्रसाद खिलाया जाता है। जानें इस परंपरा का धार्मिक महत्व और इसके पीछे की मान्यता।

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Navratri 2026 The Religious Significance of Offering Halwa Puri and Black Chana to Maa Durga
कन्या पूजन - फोटो : amar ujala

विस्तार

शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी के अवसर पर कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान भक्त छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और श्रद्धापूर्वक भोजन कराते हैं। कन्या पूजन में हलवा, पूड़ी और काले चने का प्रसाद बनाने की परंपरा खासतौर पर उत्तर भारत में प्रचलित है। इस दिन कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराने की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है। पूजा के बाद कन्याओं को भोजन कराने, दक्षिणा देने और उनका आशीर्वाद लेने का विधान है। साल 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्तूबर से हुई है और विजयादशमी 20 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस दौरान अष्टमी और नवमी तिथि पर श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा के मुहूर्त के अनुसार कन्या पूजन करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पूजा में हलवा, पूड़ी और काले चने का प्रसाद ही इतना लोकप्रिय क्यों है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के बारे में।

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Navratri 2026 The Religious Significance of Offering Halwa Puri and Black Chana to Maa Durga
कन्या पूजन - फोटो : amar ujala

कन्या पूजन में हलवा, पूड़ी और काले चने का भोग क्यों लगाया जाता है?
कन्या पूजन में छोटी बच्चियों को देवी शक्ति का प्रतीक मानकर उनका सम्मान किया जाता है। उन्हें भोजन कराना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सेवा, श्रद्धा और अतिथि सत्कार की भावना से भी जुड़ा है। भक्त कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराकर मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। हलवा, पूड़ी और काले चने का प्रसाद उत्तर भारत में लंबे समय से कन्या पूजन का हिस्सा रहा है। इन व्यंजनों को घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और सामूहिक रूप से भोजन कराने के लिए भी ये उपयुक्त माने जाते हैं। धार्मिक अवसरों पर शुद्ध और सात्विक भोजन तैयार करने की परंपरा के कारण भी इस प्रसाद का विशेष स्थान है।

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Navratri 2026 The Religious Significance of Offering Halwa Puri and Black Chana to Maa Durga
हलवा, पूड़ी और काले चने का क्या धार्मिक महत्व है? - फोटो : instagram

हलवा, पूड़ी और काले चने का क्या धार्मिक महत्व है?

  • हलवा: सूजी, घी और चीनी से तैयार हलवा मिठास, प्रसन्नता और शुभता से जोड़ा जाता है। त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों में मीठा प्रसाद बांटने की परंपरा है। कन्या पूजन में हलवा बनाकर कन्याओं को खिलाना इसी श्रद्धा और मंगलकामना को दर्शाता है।
  • पूड़ी: आटे से बनी पूड़ी पारंपरिक भारतीय भोजन का हिस्सा है। पूजा-पाठ और उत्सवों के अवसर पर इसे विशेष रूप से तैयार किया जाता है। कन्या पूजन में पूड़ी परोसना पारंपरिक आतिथ्य और भोजन-सत्कार की भावना से जुड़ा है।
  • काले चने: काले चने प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का स्रोत हैं। इन्हें शक्ति, ऊर्जा और सामर्थ्य से जोड़कर भी देखा जाता है। नवरात्र के दौरान तैयार किए जाने वाले इस पारंपरिक प्रसाद में काले चनों का खास स्थान है।

इन तीनों व्यंजनों का मेल स्वाद, परंपरा और सात्विक भोजन की भावना को एक साथ प्रस्तुत करता है। हालांकि, हलवा, पूड़ी और काले चने को मां दुर्गा का एकमात्र प्रिय प्रसाद मानने के बजाय इसे प्रचलित धार्मिक परंपरा के रूप में समझना उचित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भोग की विधि अलग हो सकती है।

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Navratri 2026 The Religious Significance of Offering Halwa Puri and Black Chana to Maa Durga
कन्या पूजन में भोजन कराने का क्या है महत्व? - फोटो : AI

कन्या पूजन में भोजन कराने का क्या है महत्व?
नवरात्र में कन्या पूजन को देवी शक्ति के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि छोटी कन्याओं में देवी का स्वरूप देखकर उनकी पूजा और सेवा करने से भक्तों को माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कन्याओं को भोजन कराने के साथ उन्हें दक्षिणा, फल, मिठाई या उपयोगी उपहार देने की परंपरा भी है। इस अनुष्ठान का भाव केवल धार्मिक विधि तक सीमित नहीं है, बल्कि बालिकाओं के प्रति प्रेम, सम्मान और सद्भाव व्यक्त करना भी है। कन्या पूजन के दौरान भोजन साफ-सफाई और श्रद्धा के साथ तैयार किया जाता है। कन्याओं को आदरपूर्वक बैठाकर भोजन कराना और उनकी पसंद तथा सुविधा का ध्यान रखना भी इस परंपरा की भावना के अनुरूप है।

Navratri 2026 The Religious Significance of Offering Halwa Puri and Black Chana to Maa Durga
क्या कन्या पूजन में यही तीन चीजें बनाना जरूरी है?

क्या कन्या पूजन में यही तीन चीजें बनाना जरूरी है?
हलवा, पूड़ी और काले चने का प्रसाद प्रचलित जरूर है, लेकिन हर परिवार और क्षेत्र में पूजा की परंपराएं एक जैसी नहीं होतीं। कुछ घरों में इसके साथ खीर, फल, मिठाई या अन्य सात्विक व्यंजन भी परोसे जाते हैं। इसलिए प्रसाद की तैयारी में स्थानीय रीति-रिवाजों और परिवार की परंपरा का ध्यान रखा जाता है। इस परंपरा का मुख्य भाव कन्याओं का सम्मान करना, उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराना और मां दुर्गा के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करना है। ऐसे में भोजन की विविधता से अधिक महत्वपूर्ण कन्याओं के प्रति आदर, स्नेह और सेवा की भावना मानी जाती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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