Mauni Amavasya 2020: मौनी अमावस्या पर कई शुभ संयोग, कैसा रहेगा शनि का परिवर्तन
धार्मिक द्दष्टि से माघ के महीने की अमावस्या का विशेष महत्व होता है। मौनी अमावस्या जिसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है 24 जनवरी को है। इस अमावस्या पर पवित्र नदियों के किनारे सुबह स्नान, ध्यान और दान करने की परंपरा है। मौनी अमावस्या पर मौन रखकर पूरे दिन व्रत रखा जाता है इसलिए इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस बार मौनी अमावस्या पर न्याय के देवता और ग्रह शनि अपनी राशि भी बदलेंगे। इस बार मौनी अमावस्या पर कई शुभ संयोग बन रहा है।
- मौनी अमावस्या शुभ संयोग mauni amavasya 2020
- मौनी अमावस्या पर शनि 30 वर्षों के बाद अपनी स्वयं की राशि मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
- अमावस्या की तिथि शनिदेव की तिथि है। इसी तिथि पर शनिदेव का जन्म हुआ था।
- मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।
- मौनी अमावस्या पर शनि के राशि बदलने से कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी और वृश्चिक राशि से उतर जाएगी।
- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 382 साल बाद मौनी अमावस्या पर शनि स्वयं की राशि मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं।
- मौनी अमावस्या पर खगोलीय घटना घटित होगी जिसमें शनि, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक सीध में आ जाएंगे।
-मौनी अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं। इनके एक साथ होने का संयोग प्रत्येक वर्ष एक ही दिन होता है।
- मौनी अमावस्या का महत्व mauni amavasya 2020
मौनी अमावस्या पर मौन धारण किया जाता है। मान्यता है इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था। सनातन परंपरा में माघ मास को अत्यंत पावन मास माना गया है। इस मास में विधि-विधान से स्नान-ध्यान एवं साधना का विशेष महत्व है। वैसे तो इस पूरे मास में ही स्नान-दान का महत्व है लेकिन अमावस्या के दिन इसका अत्यधिक महत्व है। यही कारण है कि इस तिथि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुख-समृद्धि और मोक्ष की कामना लिए पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं।
- मौनी अमावस्या पर शनि का राशि परिवर्तन: शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या
शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलने वाले एकमात्र ग्रह है। धीमी चाल चलने की वजह से इसका असर काफी दिनों तक रहता है। जिस भी जातक की कुंडली में शनि रहते हैं उन पर अपनी सीधा प्रभाव डालते हैं। शनि का असर एक राशि पर ढाई साल से साढ़े सात साल तक रहता है। जब भी शनि का गोचर एक राशि से दूसरी राशि में होता है तब शनि उस राशि के अलावा उसके पहले वाली राशि और बाद वाली एक राशि पर पड़ता है। इसे ही साढ़ेसाती कहते हैं। वहीं जब शनि का गोचर किसी राशि से चौथे और आठवें भाव में होता है तो उसको ढैय्या कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में हर 30 साल में एक बार साढ़ेसाती जरूर आती है।
- राशियों पर प्रभाव
मेष राशि- शनि के राशि बदलने से मेष राशि के जातकों पर इसका कोई असर नहीं होगा। काम आसानी से होंगे और नौकरी के लिए अनुकूल समय रहेगा।
मिथुन राशि- मिथुन राशि पर शनि की ढैय्या लगेगी। परेशानियां बढ़ेंगी और सेहत में गिरावट देखने को मिलेगा।
कर्क राशि- इस राशि के जातकों के लिए शनि शुभ फल देगा।
सिंह राशि- आपके ऊपर शनि का कोई विशेष प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा।
कन्या राशि- कन्या राशि के जातकों से शनि की ढैय्या उतर जाएगी।
तुला राशि- शनि के मकर राशि में प्रवेश करने से तुला राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या शुरू हो जाएगी। बाधाएं मिलेगी।
वृश्चिक राशि- इस राशि के जातकों पर से शनि की साढ़ेसाती उतरेगी। अच्छे दिन शुरू होंगे। कार्यों में सफलता मिलेगी। समाज में यश बढ़ेगा।
धनु राशि- धनु राशि पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण होगा। शनि शुभ फल प्रदान करेंगे।
मकर राशि- आप पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण होगा। मिला जुला परिणाम देखने को मिलेगा।
कुंभ राशि- शनि के मकर राशि में प्रवेश होने से कुंभ राशि पर साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। आर्थिक परेशानियां और नौकरी में संकट रहेगा।
मीन राशि- मीन राशि के जातकों पर शनि का सीधा प्रभाव नहीं रहेगा।