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मासिक कार्तिकगाई व्रत कल, जानिए इस पर्व का धार्मिक महत्व
Thu, 23 Apr 2020 10:26 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Thu, 23 Apr 2020 10:26 AM IST
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मासिक कार्तिगाई, 24 अप्रैल
- फोटो : Social media
अप्रैल माह में मासिक कार्तिकगाई पर्व 24 तारीख को है। यह हिन्दू धर्म का त्योहार है। इसे मासिक कार्तिकगाई दीपम के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार प्रत्येक माह में उस समय पड़ता है जब कृतिका नक्षत्र प्रबल होता है। खासकर इस पर्व को तमिल हिन्दुओं के द्वारा मनाया जाता है।
कहा जाता है कि यह त्योहार तमिल लोगों द्वारा मनाया जाने वाला प्राचीन पर्व है। कार्तिगाई के दिन शाम के समय घरों और गलियों में तेल के दीप एक पंक्ति में जलाएं जाते हैं। वैसे तो यह त्योहार प्रत्येक माह में पड़ता है। लेकिन इसका प्रमुख दिन कार्तिक मास में आता है। इस समय सूर्य ग्रह वृश्चिक राशि में स्थित होता है।
कार्तिगाई दीपम भगवान शिव को समर्पित है, जो इस सृष्टि के संहारक हैं। हिन्दु पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने सृष्टि के पालनहार विष्णु और रयचिता ब्रह्मा जी को अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए स्वयं को प्रकाश की अनन्त ज्योत में बदल लिया था।
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इसलिए आज के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। वहीं दक्षिण में मासिक कार्तिगाई के दिन तिरुवन्नामलई की पहाड़ी पर बड़ी संख्या में शिव के भक्त जाते हैं और शंकर जी की उपासना कर उनसे अपने सुखी जीवन की कामना करते हैं। भगवान शिवजी की कृपा से व्रती की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
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कहा जाता है कि यह त्योहार तमिल लोगों द्वारा मनाया जाने वाला प्राचीन पर्व है। कार्तिगाई के दिन शाम के समय घरों और गलियों में तेल के दीप एक पंक्ति में जलाएं जाते हैं। वैसे तो यह त्योहार प्रत्येक माह में पड़ता है। लेकिन इसका प्रमुख दिन कार्तिक मास में आता है। इस समय सूर्य ग्रह वृश्चिक राशि में स्थित होता है।
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कार्तिगाई दीपम भगवान शिव को समर्पित है, जो इस सृष्टि के संहारक हैं। हिन्दु पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने सृष्टि के पालनहार विष्णु और रयचिता ब्रह्मा जी को अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए स्वयं को प्रकाश की अनन्त ज्योत में बदल लिया था।
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इसलिए आज के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। वहीं दक्षिण में मासिक कार्तिगाई के दिन तिरुवन्नामलई की पहाड़ी पर बड़ी संख्या में शिव के भक्त जाते हैं और शंकर जी की उपासना कर उनसे अपने सुखी जीवन की कामना करते हैं। भगवान शिवजी की कृपा से व्रती की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।