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शादी में आने वाली बाधा दूर करती हैं यह माता
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Wed, 02 Jan 2013 03:49 PM IST
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शादी करने के इच्छुक हैं लेकिन कहीं शादी तय नहीं हो पा रही है तो माता का आशीर्वाद
लीजिए। उत्तर प्रदेश के सीतामढ़ी जिले में गुदड़ी रोड नामक स्थान पर छोटकी महारानी
मैया का मंदिर है। इस मंदिर में माता की आठ पिंडी है।
मान्यता है कि यहां माता वैष्णवी रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर के विषय में धारणा है कि यहां पर मांगी गयी मुराद पूरी होती। विवाह में आने वाली बाधा भी माता दूर कर देती है जिससे विवाह का योग जल्दी बना जाता है। इस मान्यता के कारण यहां देश के विभिन्न भागों से लोग अपनी मुराद लेकर आते हैं।
विवाह बाधा दूर करने के संदर्भ में यहां एक अनोखी मान्यता है। श्रद्धालु माता को नयी चुनरी चढ़ाते हैं और पहले से चढ़ी चुनरी को माता का आशीर्वाद मानकर साथ ले जाते हैं। माना जाता है कि इससे जल्दी शादी हो जाती है। मुराद पूरी होने के बाद यहां अपनी मुराद उतारने के लिए भी लोग आते रहते हैं, जिससे यहां सालों भर श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है।
मंदिर के विषय में मान्यता है कि यहां पर करीब दो सौ वर्ष पूर्व से माता का निवास है। श्रद्धालु यहां आकर माता की पूजा करते और अपनी मुराद पाते। महारानी माता के वर्तमान मंदिर का निर्माण यहां के निवासियों ने करवाया। इस मंदिर में वैष्णवी माता का एक विग्रह भी है जिसे 20 वर्ष पुराना माना जाता है।
मान्यता है कि यहां माता वैष्णवी रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर के विषय में धारणा है कि यहां पर मांगी गयी मुराद पूरी होती। विवाह में आने वाली बाधा भी माता दूर कर देती है जिससे विवाह का योग जल्दी बना जाता है। इस मान्यता के कारण यहां देश के विभिन्न भागों से लोग अपनी मुराद लेकर आते हैं।
विवाह बाधा दूर करने के संदर्भ में यहां एक अनोखी मान्यता है। श्रद्धालु माता को नयी चुनरी चढ़ाते हैं और पहले से चढ़ी चुनरी को माता का आशीर्वाद मानकर साथ ले जाते हैं। माना जाता है कि इससे जल्दी शादी हो जाती है। मुराद पूरी होने के बाद यहां अपनी मुराद उतारने के लिए भी लोग आते रहते हैं, जिससे यहां सालों भर श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है।
मंदिर के विषय में मान्यता है कि यहां पर करीब दो सौ वर्ष पूर्व से माता का निवास है। श्रद्धालु यहां आकर माता की पूजा करते और अपनी मुराद पाते। महारानी माता के वर्तमान मंदिर का निर्माण यहां के निवासियों ने करवाया। इस मंदिर में वैष्णवी माता का एक विग्रह भी है जिसे 20 वर्ष पुराना माना जाता है।