विज्ञापन

मलमास: 16 मई से 13 जून तक की अवधि मलमास की रहेगी, जानिए इसका महत्व

पंडित आनंदशंकर Updated Wed, 16 May 2018 09:34 AM IST
malmas starting from 16 may to 13 june and know about its importance
ख़बर सुनें
भूमि, सागर तथा आकाश में जल पार्थिव और अपार्थिव रूप से सदा मौजूद है।  पृथ्वी के तो 70 प्रतिशत भाग पर फैला है। लगता है, जैसे अपनी विपुलता के कारण यह समाज के अस्तित्व और विकास को परिभाषित करता है। सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ इसकी उपयोगिता पर्यावरण के संदर्भ में भी देखी जाती है। भारत को इक्कीसवीं सदी में पहुंचे 18 वर्ष से भी ज्यादा समय हो गया है। दुनिया के दूसरे देशों की तरह इस स्रोत को विकसित, संरक्षित कर उपयोगी ढंग से प्रबंध किया जाए तो भारत के तमाम क्षेत्र में प्रकृति की यह देन सचमुच अनिवर्चनीय सिद्ध हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सभी जानते हैं कि भारत एक विशाल देश है, जहां संसार की जनसंख्या का छठा हिस्सा और जमीन का 50वां हिस्सा होते हुए भी जल संसाधनों का सिर्फ 25वां भाग ही है। वर्षा और हिमपात से मिलने वाले जल का औसत बहुत कम, प्रति वर्ष करीब चार सौ सेमी ही आता है। दूसरी ओर शहरीकरण के कारण पानी की समस्या विकराल हुई  है। अंदाज है कि 2050 के आसपास यह मौजूदा जरूरत से दोगुना बढ़ जाएगी। यहां की 20 बड़ी नदियों में से छह नदियों का जल क्षेत्र लगातार घट रहा है। गुण और मात्रा की दृष्टि से पानी की कमी का कारण प्रदूषण, कुप्रबंधन और पानी के दुरुपयोग के साथ फिजूलखर्ची भी शामिल है। 

क्या होता है मलमास
आध्यात्मिक उपाय के तौर पर इस समस्या से निपटने के कई प्रयोग किए गए थे। अधिक मास का विधान उन्हीं में एक है। उदाहरण के लिए अभी ही दो ज्येष्ठ माह होंगे। पंचांग के हिसाब से तीन वर्षों तक तिथियों का क्षय होता है। यूं भी कह सकते हैं कि चांद्र वर्ष, सौर वर्ष से करीब 10/11 दिन छोटा होता है। इस तरह तिथियों का क्षय होने से तीसरे वर्ष एक माह बन जाता है। वह माह तीसरे वर्ष में अधिक मास के रूप में शामिल होता है। इन दिनों 16 मई से 13 जून तक की अवधि अधिक मास की रहेगी। वैसे ज्येष्ठ माह 30 अप्रैल से प्रारंभ होकर 27 जून तक रहेगा, परंतु कृष्ण और शुक्ल पक्ष के दिनों के मान से अधिक मास मई जून के मध्य भाग में रहेगा।
 
 कैसे होती है मलमास की गणना
अधिक मास को मलमास, पुरुषोत्तम मास आदि नामों से भी पुकारा जाता है। जिस चंद्र मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती, वह अधिक मास कहलाता है और जिस चंद्र मास में दो संक्रांतियों का संक्रमण हो रहा हो, उसे क्षय मास कहते हैं। इसके लिए मास की गणना शुक्ल प्रतिपदा से अमावस्या तक की गई है। सामान्यत: एक अधिक मास से दूसरे अधिक मास की अवधि 28 से 36 माह तक की हो सकती है। कुछ ग्रंथों में यह अवधि 32 माह और 14 दिवस 4 घटी बताई गई है। इस प्रकार यह कह सकते हैं कि हर तीसरे वर्ष में एक अधिक मास आता ही है। जिन लोगों को पूरे माह व्रत का पालन करना है, उन्हें भूमि पर सोना चाहिए। एक समय सात्विक भोजन और  नामजप के साथ देवपूजन, मंत्र जप एवं हवन आदि करना चाहिए। अर्थात पूरे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास या मलमास को एक अनुष्ठान उत्सव की तरह संपन्न करना चाहिए।

Recommended

कुंभ मेले में अतुल धन, वैभव, समृधि प्राप्ति हेतु विशेष पूजा करवायें और प्रसाद की होम डिलीवरी पायें
त्रिवेणी संगम पूजा

कुंभ मेले में अतुल धन, वैभव, समृधि प्राप्ति हेतु विशेष पूजा करवायें और प्रसाद की होम डिलीवरी पायें

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all spirituality news in Hindi related to religion, festivals, yoga, wellness etc. Stay updated with us for all breaking news from fashion and more Hindi News.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Religion

Lunar Eclipse 2019: ग्रहण के बाद क्या करना होता है जरूरी, जान लीजिए

lunar eclipse 2019 साल का पहला चंद्रग्रहण आज हुआ, जानिए कुछ चीजें जिसे ग्रहण के बाद करना चाहिए

21 जनवरी 2019

विज्ञापन

ये है सबसे ऊंचा शिवलिंग, जानिए क्या है खास

केरल के चेकल में महेश्वरम श्री शिव पार्वती मंदिर में दुनिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग का निर्माण किया गया है। 111.2 फुट ऊंचे इस शिवलिंग का डिजाइन और वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।

21 जनवरी 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree