Mahaveer Jayanti 2020: जानिए क्या है भगवान महावीर का जैन दर्शन
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महावीर जयंती (Mahavir Jayanti 2020) जैन समुदाय का बड़ा पर्व है। इस पर्व को जैन समुदाय के लोग 24वें तीर्थंकर महावीर के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। अहिंसा के सिद्धांत पर जोर देने वाले भगवान महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 6 अप्रैल सोमवार को है। महावीर जयंती को जैन समुदाय के लोगों द्वारा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन जैन मंदिरों में लोग पूजा करते हैं और शोभायात्रा भी निकालते हैं। लेकिन इस समय देशभर में कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन लगा हुआ है, लिहाजा लोग अपने घरों में ही यह पर्व मनाएंगे।
भगवान महावीर का जीवन
भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था। उनका जन्म वैशाली के कुंडलग्राम में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहां हुआ था। लेकिन 30 वर्ष की आयु में अपने राजसी जीवन को त्यागकर वे सत्य की खोज में निकल पड़े और एक महात्मा बनकर दुनिया को अहिंसा परमो धर्म: का पाठ पढ़ाया। जैन पवित्र पुस्तकों के अनुसार, वैशाख के दसवें दिन वे पटना के निकट पावा नामक नगर में पहुंचे थे, जहां उन्हें कैवल्य की प्राप्ति हुई और उनका नाम महावीर पड़ा।
जैन दर्शन
महावीर ने जैनियों को अपने अंदर त्याग, कठोर तपस्या और नैतिकता विकसित करने करने की सीख दी। जैन नैतिक रूप से अपने धर्म से बंधे हैं ताकि वे ऐसा जीवन व्यतीत करें जो अन्य किसी प्राणी को हानि न पहुंचाए। महावीर का विश्वास था कि सही विश्वास (सम्यक दर्शन), सही ज्ञान (सम्यक ज्ञान) और सही आचरण (सम्यक चरित) से कोई भी व्यक्ति स्वयं को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर सकता है। जैनियों को जीवन में पांच निग्रहों का पालन करने की आवश्यकता है -
अहिंसा (हिंसा का त्याग)
सत्य (सच्चाई)
अस्तेय (चोरी न करना)
अपरिग्रह (उपार्जन न करना)
ब्रह्मचर्य (जीवन में समय)