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जहां गल कर पानी बन जाता है इंसान, कृष्ण ने भेजा पाण्डवों को
टीम डिजिटल
Updated Sat, 04 Jan 2014 07:51 AM IST
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महाभारत का युद्घ समाप्त होने के बाद पाण्डवों को अपने सगे-संबंधियों की हत्या के पाप से मुक्ति दिलाने के लिए कृष्ण ने कई उपाय बताए। इनमें एक उपाय ऐसा था जो काफी चौंकाने वाला था।
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भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि पाण्डव तीर्थयात्रा पर जाएं। हर तीर्थ पर पाण्डव अपने हथियारों को तीर्थ के जल से धोएं। जिस स्थान पर भीम की गदा गलकर पानी बन जाए समझ लेना यह मुक्ति स्थान है। भीम की गदा का पानी में घुल जाना संकेत होगा कि तुम्हारे पाप धुल गए।
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पाण्डव सालों साल तीर्थ यात्रा करते रहे। हर तीर्थ स्थान पर हथियारों को धोया लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। चलते चलते पाण्डव राजस्थान पहुंचे। यहां पहुंचकर पाण्डवों ने मालकेतु पर्वत पर स्थित सूर्य कुंड में अपने हथियारों को धोया और चमत्कार हो गया।
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भीम की गदा के साथ-साथ युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव के हथियार भी गलकर पानी में हो गए। आज यह स्थान झुंझुनू जिले में स्थित है और लोहार्गल नाम से प्रसिद्घ है। इस घटना के बाद से सूर्य कुंड भीम कुंड भी कहलाने लगा।
माना जाता है कि सूर्य कुंड में मृतक व्यक्ति की अस्थियां विसर्जित करने से अस्थियां गल कर पानी में घुल जाती हैं और मृतक व्यक्ति को तुरंत मुक्ति मिल जाती है।
इस तीर्थ स्थान पर हर साल चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के अवसर पर मेला लगता है। सोमवती अमावस्या और भाद्रपद अमावस्या के दिन भी यहां श्रद्घालुओं की भीड़ होती है।