जानिए एक छोटा सा मूषक कैसे बना भगवान गणेश का वाहन
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गणेश जी को बुद्धि, समृद्धि, विद्या और शुभता का देवता माना जाता है। भगवान गणेश गजमुख हैं इसलिए उन्हें गजानन भी कहते हैं। भगवान गणेश की पूजा करने से बुद्धि की प्राप्ति होती हैं। व्यक्ति का हर कार्य बिना किसी विघ्न-बाधा के पूरा हो जाता है। तस्वीरों और प्रतिमाओं में भगवान गणेश का शरीर हुष्ट-पुष्ट दिखाया जाता है, परंतु भगवान श्री गणेश का वाहन एक छोटा सा मूषक है। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं तो चलिए जानते हैं कि भगवान गणेश ने मूषक को अपना वाहन क्यों बनाया।
पौराणिक कथा के अनुसार जब एक बार स्वर्ग के देवराज इन्द्र सभी देव गणों के साथ किसी गंभीर विषय पर चर्चा कर रहे थे। उस सभा में गन्धर्व और अप्सराएं भी मौजूद थी। सभी देव गण इंद्रदेव की बातों को बड़े ही ध्यान से सुन रहे थे। सभा में एक क्रौंच नाम का गन्धर्व भी उपस्थित था। वह देवराज की बातें न सुनकर अप्सराओं के साथ हंसी ठिठोली में मग्न था। यह सब देखने के पश्चात भी इंद्रदेव ने केवल उसे इशारे में समझाया, परंतु क्रौंच पर इसका कुछ भी असर नहीं हुआ क्योंकि वह उस समय उन्माद में डूबा हुआ था। उसकी इस हरकत से देवराज को क्रोध आ गया, जिसके बाद उन्होंने उसे श्राप दे दिया कि वह एक मूषक बन जाए।
देवराज के श्राप के कारण क्रौंच तुरंत ही गन्धर्व से मूषक बन गया। मूषक बनने के बाद वह पूरे इंद्र लोक में इधर उधर भागने लगा। जब सभी उसके उत्पात से परेशान हो गए तो इंद्र ने उसे देवलोक के बाहर फ़ेंकने का आदेश दिया, जिसके पश्चात द्वारपालों ने क्रौंच को स्वर्ग लोक के बहार फेंक दिया। जैसे ही स्वर्ग लोग से क्रौंच पक्षी को द्वारपालों ने बाहर फेंका वह सीधा ऋषि पराशर के आश्रम में जा गिरा। वहां उसने क्रोध में आकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया। उसने सारे पात्रों को छिन्न भिन्न कर दिया और वहां पर रखा हुआ अनाज एवं सारा भोजन चट कर गया। यही नहीं उसने ऋषियों के वस्त्र और उनकी धार्मिक पुस्तकें भी कुतर डाली।
ऐसे मूषक बना भगवान गणेश का वाहन
जब पाश मूषक को पाताल लोक से ढूंढ कर गणेश जी के सामने लाया तो उनके सम्मुख आते ही मूषक भय से कांपने लगा। मूषक की यह दशा देख कर गणेश जी हंसने लगे। उन्हें हंसता हुआ देख मूषक भी सामान्य हो गया और उसने भगवान गणेश से कहा कि आप जो चाहे मुझसे माँग सकते हैं। मूषक ये बात सुनते ही भगवान गणेश उसके ऊपर विराजमान हो गए और उससे अपना वाहन बनने को कहा, परंतु वह छोटा सा मूषक उनका भार उठाने में सक्षम नहीं था। तब उसने भगवान से प्रार्थना की ''हे प्रभु मुझे इतनी शक्ति प्रदान करें कि मैं आपका भार सहन कर संकू'' तब गणेश जी ने उसे तथास्तु कहा और इस प्रकार मूषक उनका वाहन बन गया।