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सवाल-जवाब से जानिए वेदों और सनातन धर्म से जुड़ी रोचक जानकारी

Mon, 28 Dec 2020 12:28 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 28 Dec 2020 12:28 PM IST
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know everything about vedas and sanatan 
वेदों और सनातन धर्म से जुड़ी सारी जानकारी - फोटो : सोशल मीडिया

सनातन परंपरा सनातन काल से निरंतर चली आ रही है। यह बहुत व्यापक परंपरा है। इसमें निहित अथाह ज्ञान को वेदों और शास्त्रों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। आज हम वेदों और सनातन परंपरा से जुड़े हर महत्वपूर्ण तथ्यों को सवाल जवाब के माध्यम से जानेंगे। 

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प्रश्न-  वेद किसे कहते हैं ?
उत्तर-  ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते हैं।

प्रश्न-  वेद-ज्ञान किसने दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने दिया।

प्रश्न-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।

प्रश्न-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?
उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण के लिए।

प्रश्न-  वेद कितने हैं ?
उत्तर- चार ।                                                  
1-ऋग्वेद 
2-यजुर्वेद  
3-सामवेद
4-अथर्ववेद

वेदों के ब्राह्मण 
    वेद              ब्राह्मण
1 - ऋग्वेद      -     ऐतरेय
2 - यजुर्वेद      -     शतपथ
3 - सामवेद     -    तांड्य
4 - अथर्ववेद   -   गोपथ

प्रश्न-  वेदों के उपवेद कितने है?
उत्तर -  चार।
      वेद                     उपवेद
    1- ऋग्वेद       -     आयुर्वेद
    2- यजुर्वेद       -    धनुर्वेद
    3 -सामवेद      -     गंधर्ववेद
    4- अथर्ववेद    -     अर्थवेद

प्रश्न-  वेदों के अंग हैं
उत्तर -  छः
1 - शिक्षा
2 - कल्प
3 - निरूक्त
4 - व्याकरण
5 - छंद
6 - ज्योतिष

प्रश्न- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन-किन ऋषियों को दिया ?
उत्तर- चार ऋषियों को।
     वेद                ऋषि
1- ऋग्वेद         -      अग्नि
2 - यजुर्वेद       -       वायु
3 - सामवेद      -      आदित्य
4 - अथर्ववेद    -     अंगिरा

प्रश्न-  वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?
उत्तर- समाधि की अवस्था में।

प्रश्न-  वेदों में क्या है?
उत्तर-  सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान।

प्रश्न-  वेदों के विषय कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-   चार ।
        ऋषि        विषय
1-  ऋग्वेद    -    ज्ञान
2-  यजुर्वेद    -    कर्म
3-  सामवेद    -    उपासना
4-  अथर्ववेद -    विज्ञान

वेदों से जुड़ी जानकारी
ऋग्वेद
1-  मंडल      -  10
2 - अष्टक     -   08
3 - सूक्त        -  1028
4 - अनुवाक  -   85 
5 - ऋचाएं     -  10589

यजुर्वेद
1- अध्याय    -  40
2- मंत्र           - 1975

सामवेद
1-  आरचिक   -  06
2 - अध्याय     -   06
3-  ऋचाएं       -  1875

अथर्ववेद
1- कांड      -    20
2- सूक्त      -   731
3 - मंत्र       -   5977
          
प्रश्न-  वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?           
उत्तर-  मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।

प्रश्न-  क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?
उत्तर-  बिलकुल भी नहीं।

प्रश्न-  क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?
उत्तर-  नहीं।

प्रश्न-  सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?
उत्तर-  ऋग्वेद।

प्रश्न-  वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?
उत्तर-  वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई। अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व । 

प्रश्न- दर्शन कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?
उत्तर- 
1-  न्याय दर्शन  - गौतम मुनि।
2- वैशेषिक दर्शन  - कणाद मुनि।
3- योगदर्शन  - पतंजलि मुनि।
4- मीमांसा दर्शन  - जैमिनी मुनि।
5- सांख्य दर्शन  - कपिल मुनि।
6- वेदांत दर्शन  - व्यास मुनि।

प्रश्न-  शास्त्रों के विषय क्या हैं ?
उत्तर-  आत्मा,  परमात्मा, प्रकृति,  जगत की उत्पत्ति,  मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक  ज्ञान-विज्ञान आदि।

प्रश्न-  प्रामाणिक उपनिषद कितनी है ?
उत्तर-  केवल ग्यारह।

प्रश्न-  उपनिषदों के नाम बताएं?
उत्तर-  
01-ईश ( ईशावास्य )  
02-केन  
03-कठ  
04-प्रश्न  
05-मुंडक  
06-मांडू  
07-ऐतरेय  
08-तैत्तिरीय 
09-छांदोग्य 
10-वृहदारण्यक 
11-श्वेताश्वतर ।

प्रश्न-  उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए हैं ?
उत्तर- वेदों से।
प्र.24- चार वर्ण।
उत्तर- 
1- ब्राह्मण
2- क्षत्रिय
3- वैश्य
4- शूद्र

चार युग
1- सतयुग - 17,28000  वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है।
2- त्रेतायुग- 12,96000  वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।
3- द्वापरयुग- 8,64000  वर्षों का नाम है।
4- कलयुग- 4,32000  वर्षों का नाम है।
कलयुग के 5122 वर्षों का भोग हो चुका है अभी तक।
4,27024 वर्षों का भोग होना है। 

पंच महायज्ञ
       1- ब्रह्मयज्ञ   
       2- देवयज्ञ
       3- पितृयज्ञ
       4- बलिवैश्वदेवयज्ञ
       5- अतिथियज्ञ
   
स्वर्ग  -  जहाँ सुख है।
नरक  -  जहाँ दुःख है।.
 
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