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Karwa Chauth 2020: करवा चौथ पूजा के समय पढ़ें करवा माता की कथा

Tue, 03 Nov 2020 04:45 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 03 Nov 2020 04:45 PM IST
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Karwa chauth puja 2020 Read the story of Karwa Mata at the time of worship on Karva Chauth
karwa chauth 2020 व्रत कथा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते का प्रतीक है। हर साल कार्तिक मास की के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस साल सुहागिन महिलाओं के द्वारा यह व्रत 4 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत करती हैं। कथा पढ़ती हैं और रात में चंद्रोदय होने के पश्चात अर्घ्य देकर पति के हाथ से पानी पीकर अपने व्रत का पारण करती हैं। करवा चौथ पर करवा माता की कथा पढ़ने का बहुत ही महत्व माना गया है। कथा पढ़ने के लिए सुहागिन महिलाएं एक स्थान पर इकट्ठी होकर पूजा करती हैं और करवा माता से अपने पति की लंबी आयु एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। जानते हैं करवा माता की पूरी कथा...

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तुंगभद्रा नदी के पास देवी करवा अपने पति के साथ रहा करती थीं। जब एक दिन उनके पति नदी में स्नान करने गए तो अचानक एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया, वह मगर उन्हें नदी में खींचने लगा। उनके पति मृत्यु करीब देखकर करवा को पुकारने लगे। अपने पति की आवाज सुनकर करवा दौड़कर नदी के पास पहुंचीं जैसे ही उन्होंने देखा कि मगर उनके पति को मृत्यु के मुंह में ले जा रहा है। उन्होंने तुरंत एक कच्चा धागा लेकर मगरमच्छ को एक पेड़ से बांध दिया। करवा के पतिव्रत के तप के कारण मगरमच्छ कच्चे धागे में ऐसा बंधा की टस से मस नहीं हो पा रहा था, परंतु मगमच्छ के साथ करवा के पति प्राण अब भी संकट में फंसे थे।

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तब करवा ने यमराज को पुकारा और अपने पति को जीवनदान देने एवं मगरमच्छ को मृत्युदंड देने के लिए कहा। यमराज ने कहा मैं ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि अभी मगरमच्छ की आयु शेष है, परंतु तुम्हारे पति की आयु पूरी हो चुकी है। तब दुखः और क्रोध में होकर करवा ने यमराज से कहा, अगर आपने ऐसा नहीं किया तो मैं आपको शाप दे दूंगी। उनके सतीत्व के शाप से भयभीत होकर यमराज ने तुरंत मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया और करवा के पति को जीवनदान दे दिया। इसलिए करवाचौथ के व्रत में सुहागन स्त्रियां करवा माता से प्रार्थना करती हैं कि हे करवा माता जैसे आपने अपने पति को मृत्यु के मुंह से वापस निकाल लिया वैसे ही मेरे सुहाग की भी रक्षा करना। 

                                                                                       ।।जय करवा माता की।।

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