Karwa Chauth 2020: करवा चौथ पूजा के समय पढ़ें करवा माता की कथा
करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते का प्रतीक है। हर साल कार्तिक मास की के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस साल सुहागिन महिलाओं के द्वारा यह व्रत 4 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत करती हैं। कथा पढ़ती हैं और रात में चंद्रोदय होने के पश्चात अर्घ्य देकर पति के हाथ से पानी पीकर अपने व्रत का पारण करती हैं। करवा चौथ पर करवा माता की कथा पढ़ने का बहुत ही महत्व माना गया है। कथा पढ़ने के लिए सुहागिन महिलाएं एक स्थान पर इकट्ठी होकर पूजा करती हैं और करवा माता से अपने पति की लंबी आयु एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। जानते हैं करवा माता की पूरी कथा...
तुंगभद्रा नदी के पास देवी करवा अपने पति के साथ रहा करती थीं। जब एक दिन उनके पति नदी में स्नान करने गए तो अचानक एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया, वह मगर उन्हें नदी में खींचने लगा। उनके पति मृत्यु करीब देखकर करवा को पुकारने लगे। अपने पति की आवाज सुनकर करवा दौड़कर नदी के पास पहुंचीं जैसे ही उन्होंने देखा कि मगर उनके पति को मृत्यु के मुंह में ले जा रहा है। उन्होंने तुरंत एक कच्चा धागा लेकर मगरमच्छ को एक पेड़ से बांध दिया। करवा के पतिव्रत के तप के कारण मगरमच्छ कच्चे धागे में ऐसा बंधा की टस से मस नहीं हो पा रहा था, परंतु मगमच्छ के साथ करवा के पति प्राण अब भी संकट में फंसे थे।
।।जय करवा माता की।।