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जिस पत्थर पर कभी भगवान यह खेल खेला करते थे
टीम डिजिटल
Updated Fri, 29 Nov 2013 03:47 PM IST
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आपने देखा होगा कि बच्चे पत्थरों पर या किसी चिकने स्थान पर ऊपर चढ़कर नीचे की ओर फिसलने का खेल खेला करते हैं। हमारे बाल गोपाल भी धरती पर मनुष्य रूप में आये थे तो मानव के समान इन्हें भी लीला करनी थी। इसलिए आम बच्चों की तरह कभी गेंद से खेला करते तो कभी लुका-छिपी का खेल करते।
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कभी राजा और प्रजा का खेल खेलते तो कभी चिकने पत्थर के ऊपर चढ़कर फिसलम फिसलाई का खेल खेलते। जिस स्थान पर भगवान गौए चराते हुए फिसलम-फिसलाई का खेल खेलते थे वह स्थान काम्यवन में आज भी मौजूद है। यहां आज भी वह चिकना पत्थर मौजूद है जिस पर कभी श्री कृष्ण खेला करते थे।
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कृष्ण अपनी लीला पूरी करके भले ही बैकुण्ठ चले गए हैं लेकिन यहां बच्चों को उसी प्रकार से चिकने पत्थर पर फिसलम-फिसलाई का खेल खेलते हुए देखा जा सकते है। यहां आने जाने वाले यात्री ठहरक बच्चों का खेल देखते हुए बच्चों में श्री कृष्ण की छवि निहारते हैं। उन्हें लगता है कि भगवान अभी भी बाल लीला कर रहे हैं।
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काम्यवन मथुरा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर एक मनोरम स्थान है, यहां के सरोवर, पत्थर और वृक्ष कृष्ण से जुड़ी कई कहानियां कहते हैं। यहां श्री कृष्ण ने सखियों के कहने पर एक सरोवर पर रामसेतु की तरह बंदरों से सेतु का निर्माण करवाया था। सेतु के ध्वांसावशेष और रामेश्वर मंदिर कृष्ण लीला की याद ताजा कर देते हैं।