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सूली पर लटकाए जाने के बाद नहीं मरे थे जीसस क्राइस्ट?

Tue, 24 Dec 2013 02:58 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 24 Dec 2013 02:58 PM IST
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jesus christ death controversy

जिसस क्राईस्ट यानी ईसा मसीह के बारे में कहा जाता है कि यहूदियों को ईसा की बढ़ती लोकप्रियता से तकलीफ होने लगी। उन्हें लगने लगा कि ईसा उनसे सत्ता न छीन लें। इसलिए साजिश के तहत इन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया।

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सूली पर चढ़ाए जाने के बाद यह माना गया कि ईसा की मौत हो गई है। लेकिन असलियत यह है कि ईसा सूली पर चढ़ाए जाने के बाद भी जीवित रह गए थे। यह कहना है रूसी स्कालर 'निकोलाई नोटोविच' का। इन्होंने अपनी पुस्तक 'द अननोन लाईफ ऑफ जीसस क्राइस्ट' में लिखा है कि सूली पर चढ़ाए जाने के जिसस मरे नहीं थे।
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सूली पर चढ़ाए जाने के तीन दिन बाद यह अपने परिवार और मां मैरी के साथ तिब्बत के रास्ते भारत आ गए। भारत में श्रीनगर के पुराने इलाके को इन्होंने अपना ठिकाना बनाया। 80 साल की उम्र में जिसस क्राइस्ट की मृत्यु हुई। माना जाता है कि क्राइस्ट का मकबरा श्री नगर के रोजबाल बिल्डिंग में आज भी है।


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इतिहासकार सादिक ने अपनी ऐतिहासिक कृति 'इकमाल-उद्-दीन' में उल्लेख किया है कि जीसस भारत में कई बार आए थे। अपनी पहली यात्रा में इन्होंने तांत्रिक साधना एवं योग का अभ्यास किया।

इसी के बल पर सूली पर लटकाये जाने के बावजूद जीसस जीवित रह गए। बाईबल में भी इस बात का उल्लेख है कि ईसा मसीह सूली पर लटकाए जाने के तीन दिन बाद अपने समर्थकों के बीच आए थे। इस दिन को ईस्टर के नाम से जाना जाता है।

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