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Jaya Ekadashi 2022 : जया एकादशी करने से मिलता है बहुत पुण्य, जानें इस व्रत के नियम
Sat, 12 Feb 2022 09:44 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 12 Feb 2022 09:44 AM IST
सार
जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को नीच योनि से मुक्ति मिलती है एवं मृत्यु के बाद भूत-प्रेत नहीं बनना पड़ता है। जो इस वर्ष 12 फरवरी, शनिवार को है।
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Jaya Ekadashi 2022 : पदम पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी तिथि का महत्त्व बताते हुए कहा है कि सभी एकादशियों में नारायण के समान ही फल देने की शक्ति होती है।
- फोटो : istock
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विस्तार
सनातन धर्म में एकादशी तिथि के व्रत-पूजन का सर्वाधिक महत्त्व बताया गया है। पुराणों में माघ महीना को बड़ा ही पुण्यदायी कहा गया है। इस महीने में स्नान, दान, व्रत का फल अन्य महीनों से अधिक बताया गया है। माघ महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। यह एकादशी बहुत ही पुण्यदायी है, इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को नीच योनि से मुक्ति मिलती है एवं मृत्यु के बाद भूत-प्रेत नहीं बनना पड़ता है। जो इस वर्ष 12 फरवरी, शनिवार को है।
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जया एकादशी का महत्व
पदम पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी तिथि का महत्त्व बताते हुए कहा है कि सभी एकादशियों में नारायण के समान ही फल देने की शक्ति होती है। इस व्रत को करने के बाद और कोई पूजा करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इनमें जया एकादशी प्राणी के इस जन्म और पूर्व जन्म के समस्त पापों का नाश करने वाली उत्तम तिथि है। इतना ही नहीं, यह ब्रह्मह्त्या जैसे जघन्य पाप तथा पिशाचत्व का भी विनाश करने वाली है। श्रीविष्णु को प्रिय इस एकादशी का भक्तिपूर्वक व्रत करने से मनुष्य को कभी भी पिशाच या प्रेत योनि में नहीं जाना पड़ता और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। धर्मग्रंथों में इस एकादशी के लिए कहा गया है कि जिसने 'जया एकादशी ' का व्रत किया है उसने सब प्रकार के दान दे दिए और सम्पूर्ण यज्ञों का अनुष्ठान कर लिया। इस व्रत को करने से व्रती को अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है।
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विष्णु भगवान की करें पूजा
एकादशी स्वयं विष्णुप्रिया है इसलिए इस दिन जप-तप ,पूजा-पाठ करने से प्राणी जगत नियंता विष्णु का सानिध्य प्राप्त कर लेता है। साधक को इस दिन सात्विक रहकर भगवान विष्णु की मूर्ति को 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का उच्चारण करते हुए स्नान आदि कराकर वस्त्र, चन्दन, जनेऊ,गंध, अक्षत, पुष्प, तिल, धूप-दीप, नैवैद्य , ऋतुफल, पान, नारियल,आदि अर्पित करके कपूर से आरती उतारनी चाहिए। सात्विक भोजन करें एवं तामसी पदार्थों के सेवन से दूर रहें।
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व्रत के नियम
- भगवान विष्णु के विधिवत पूजन के साथ ही एकादशी का व्रत नियमानुसार पालन करना चाहिए।
- इस दिन तुलसी दल से श्री हरि का पूजन करें लेकिन तुलसी दल एक दिन पूर्व तोड़कर रखे।
- व्रत के दिन भोजन में चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- व्रत से पूर्व यानि दशमी तिथि के दिन से तामसिक भोजन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
- व्रत रखने वाले व्यक्ति को क्रोध एवं दूसरे की बुराई करने से बचना चाहिए। किसी के बारे में कुछ भी गलत बोलना और सोचना नहीं चाहिए।
- व्रत रखने वालों को व्रत वाले दिन नाखून, बाल, दाढ़ी आदि नहीं काटने चाहिए और स्त्रियों को इस दिन बाल नहीं धोने चाहिए।