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आज है वह व्रत जिससे यमलोक नहीं जाना पड़ता है
टीम डिजीटल
Updated Mon, 30 Sep 2013 07:45 AM IST
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आज आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा है कि इस एकादशी का नाम इन्दिरा एकादशी है। जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान हृषिकेश की पूजा करता है वह मृत्यु के बाद यमलोक जाने से बच जाता है।
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इतना ही नहीं जो पूर्वक किसी पाप के कारण यमलोक में जाकर यम की यातना सह रहे हैं उन्हें भी यम के कोप से मुक्ति मिल जाती है और वैकुण्ठ जाने का अधिकारी बन जाता है। इन्दिरा एकादशी पितरों को मुक्ति प्रदान करने वाला होने के कारण ही पितृ पक्ष में आता है।
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इस संदर्भ में एक कथा है कि राजा इन्द्रसेन के पिता को किसी पाप के कारण यमलोक जाना पड़ा। एक दिन इन्द्रसेन के पिता ने सपने में आकर इन्द्रसेन से कहा कि मैं यमलोक में सजा पा रहा हूं। मेरी मुक्ति के लिए कोई उपाय करो। पिता को तकलीफ में जानकर इन्द्रसेन परेशान थे। इसी बीच एक दिन नारद मुनि इन्द्रसेन के दरबार में पधारे।
नारद मुनि ने इन्द्रसेन से कहा कि आप आश्विन कृष्ण एकादशी का व्रत करके इसका पुण्य अपने पिता को दे दीजिए इससे आपके पिता यमलोक से मुक्त हो जाएंगे। राजा ने देवराज नारद के बताए विधि के अनुसार एकादशी का व्रत किया। अगले दिन इन्होंने ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा प्रदान किया। इसके प्रभाव से इन्द्रसेन के पिता वैकुण्ड चले गए। मृत्यु के बाद इन्द्रसेन को भी वैकुण्ठ में स्थान प्राप्त हुआ।
व्रत विधि:
व्रत करने वाले को एकादशी के दिन प्रात: स्नान करके भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए। मौसमी फलों एवं फूलों से भगवान की पूजा करके विष्णु भगवान के नाम का कीर्तन करना चाहिए। परिवार में जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है उनका नाम लेकर भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि उन्हें सद्गति प्रदान करें।
द्वादशी के दिन यानी व्रत के अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाकर स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए।