सदियों से आखिर क्यों है ये मंदिर अधूरें, कारण कर देंगे हैरान
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देशभर में कई मंदिर अपनी भव्यता के कारण प्रसिद्घ है। कई मंदिर अत्यन्त विशाल है तो कुछ अपनी खूबसूरती के कारण विख्यात है। इन मंदिर में हमेशा ही भक्तों की लंबी कतार देखने को मिल जाएगी, लेकिन देश में कुछ ऐसे भी मंदिर है, जो सदियों से अधूरे ही खड़े हैं और इन अधूरे मंदिरों के लिए भी भक्तों की वहीं श्रद्घा है, जो देश में भव्य मंदिरों के प्रति हैं। हर मंदिर के अधूरे रहने के पीछे कोई ना कोई रहस्य है। जानें इन अधूरे मंदिरों के पीछे का रहस्य
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भोजेश्वर मंदिर
भोपाल से करीब 32 किमी. दूर है भोजपुर गांव, जहां भगवान शिव का अधूरा मंदिर है। अगर ये मंदिर पूरा बन जाता तो ये भारत के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक होता। इस मंदिर की छत न बनी होने के कारण यह मंदिर अधूरा है। मंदिर का निर्माण और यहां शिवलिंग की स्थापना परमार राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में करवाया था। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक ही रात ने किया जाना था, लेकिन मंदिर की छत पूरी होने से पहले ही सुबह हो गई और यह काम अधूरा रह गया, जो आज तक अधूरा ही है। यह मंदिर चार स्तंभों के सहारे खड़ा है। इस मंदिर की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका चबूतरा ही करीब 35 मी लंबा है और शिवलिंग की ऊंचाई 12 फीट है। मंदिर से कुछ दूरी पर बेतवा नदी के किनारे माता पार्तती की गुफा भी है।
जांजगीर विष्णु मंदिर
छत्तीसगढ का जांजगीर चांपा क्षेत्र में भी भगवान विष्णु का एक अधूरा मंदिर है। यह मंदिर बिलासपुर से करीब 60 मील दूरी पर स्थति है। इस मंदिर के अधूर रहने के पीछे माना जाता है कि शिवरीनारायण मंदिर और जांजगीर मंदिर के निर्माण के बीच एक प्रतियोगिता शुरू हुई और जो मंदिर पहले बनता उसी मंदिर में भगवान विष्णु पधारेंगे। शिवरीनारायण मंदिर पहले बन गया और जांजगीर मंदिर को अधूरा छोड़ दिया गया था। स्थानीय स्तर पर इस मंदिर को नकाटा मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर लाल मिट्टी की ईंटो से बना है। एक अन्य कथा के अनुसार इस मंदिर निर्माण की प्रतियोगिता में पाली के शिव मंदिर को भी शामिल किया था। मंदिर के पास मौजूद तालाब के बारे में कहा जाता है कि भीम ने पांच बार फाबड़ा चलाकर खोदा था।