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इन दो चीजों के बिना किया गया श्राद्घ पितरों को प्राप्त नहीं होता

Fri, 20 Sep 2013 11:56 AM IST
टीम डिजिटल
टीम डिजिटल Updated Fri, 20 Sep 2013 11:56 AM IST
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importance of kush and til in shradh

हर व्यक्ति यही चाहता है कि उनके पितर यानी उनके पूर्वक मृत्यु के बाद उत्तम लोक में जाएं और सुखी रहें। इसका करण यह भी है कि पितरों के खुश और सुखी रहने से परिवार में सुख-समृद्घि और उन्नति बनी रहती है। इसलिए हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमवस्या तक पितरों का श्राद्घ तर्पण और पिण्डदान किया जाता है।

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19 सितम्बर से श्राद्घ पक्ष शुरू हो चुका है और लोग अपने पितरों का पिण्डदान कर रहे हैं। लेकिन श्राद्घ में सबसे ज्यादा जरूरी है श्रद्घा और कुश एवं तिल। इनके बिना किया गया श्राद्घ पितरों को नहीं पहुंच पाता है।
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शास्त्रों में कहा गया है कि काला तिल भगवान विष्णु का प्रिय है और यह देव अन्न है। इसलिए पितरों को भी तिल प्रिय है। इसलिए काले तिल से ही श्राद्धकर्म करने का विधान है। मान्यता है कि बिना तिल बिखेरे श्राद्ध किया जाए, तो दुष्ट आत्माएं हवि को ग्रहण कर लेती हैं।
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श्राद्ध में कुश का महत्व
गरुड़ पुराण के अनुसार, तीनों देवता ब्रह्मा, विष्णु, महेश कुश में क्रमशः जड़, मध्य और अग्रभाग में वास करते हैं। पितृपक्ष में पितर कुश की नोक पर निवास करते हैं। इसी कारण तर्पण करते समय कुश को अंगुलियों में धारण किया जाता है।

इससे तर्पण करते समय पितरों को दिया जाने वाला जल एवं पिण्ड उनका आसानी से पहुंच जाता है और वह प्रसन्नता पूर्वक इसे प्रहण करके संतुष्ट हो जाते हैं।

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