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समस्त प्राणियों की शुद्धि का माह कार्तिक महीना
Wed, 09 Oct 2019 12:34 PM IST
विनोद शुक्ला
पं. जयगोविंद शास्त्री
पं. जयगोविंद शास्त्री
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 09 Oct 2019 12:34 PM IST
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कार्तिक माह
कार्तिक माह श्रेष्ठतम महीनों में से एक है। स्वयं नारायण ने भी कहा है कि कार्तिक माह मुझे अतिप्रिय है। इस माह का एक-एक पल स्वामी कार्तिकेय और भगवान विष्णु जी को समर्पित है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में मां श्रीमहालक्ष्मी पृथ्वी पर आकर सम्पूर्ण कार्तिक माह में भगवान विष्णु के निद्रा त्यागने से पहले सम्पूर्ण सृष्टि की व्यवस्था देखती हैं। सभी ऋषि, मुनि, योगी और सन्यासियों का चातुर्मास्य व्रत भी इसी माह में कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को जगतगुरु विष्णु के पूजन के साथ संपन्न होता है।
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इस माह की त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा को शास्त्रों ने अति पुष्करिणी कहा है, स्कन्द पुराण के अनुसार जो प्राणी कार्तिक मास में प्रतिदिन स्नान करता है वह इन्हीं तीन तिथियों की प्रातः स्नान करने से पूर्ण फल का भागी हो जाता है। त्रयोदशी को स्नानोपरांत समस्त वेद प्राणियों समीप जाकर उन्हें पवित्र करते हैं।
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चतुर्दशी में समस्त देवता एवं यज्ञ सभी जीवों को पावन बनाते हैं, और पूर्णिमा को स्नान अर्घ्य, तर्पण, जप, तप, पूजन, कीर्तन दान-पुण्य करने से स्वयं भगवान विष्णु प्राणियों को ब्रह्मघात और अन्य कृत्या-कृत्य पापों से मुक्त करके जीव को शुद्ध कर देते हैं। इन तीन दिनों में भगवत गीता एवं श्रीसत्यनारायण व्रत की कथा का श्रवण, गीतापाठ विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करने से प्राणी पापमुक्त-कर्ज मुक्त होकर भगवान श्रीविष्णु जी की कृपा पाता है।
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इन दिनों में झूठ बोलना, चोरी-ठगी करना, धोखा देना, जीव हत्या करना, गुरु की निंदा करने व मदिरापान करने से बचना चाहिए। एकादशी से पूर्णिमा तक के मध्य भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए खुले आसमान में दीप जलाते हुए इस मंत्र - दामोदराय विश्वाय विश्वरूपधराय च ! नमस्कृत्वा प्रदास्यामि व्योमदीपं हरिप्रियम् !!
अर्थात -मै सर्वस्वरूप एवं विश्वरूपधारी भगवान दामोदर को नमस्कार करके यह आकाशदीप अर्पित करता हूँ जो भगवान को अतिप्रिय है। साथ ही इसमंत्र का ''नमः पितृभ्यः प्रेतेभ्यो नमो धर्माय विष्णवे ! नमो यमाय रुद्राय कान्तारपतये नमः !! उच्चारण करते हुए, 'पितरों को नमस्कार है, प्रेतों को नमस्कार है, धर्म स्वरूप श्रीविष्णु को नमस्कार है, यमदेव को नमस्कार है तथा जीवन यात्रा के दुर्गम पथ में रक्षा करने वाले भगवान रूद्र को नमस्कार है का उच्चारण करते हुए आकाशदीप जलाएं। इसप्रकार प्राणी कार्तिक माह में भगवान की कृपा का पात्र बन सकता हैं।