कैसे होते हैं स्वर्ग और नर्क, जानिए परलोक का रहस्य
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हिंदू धर्म के कई ग्रंथों में परलोक की बड़े विस्तार से व्याख्या की गई है। अनेक ग्रंथों में स्वर्ग और नर्क जाने के रास्ते, कर्म आधारित फल और इनके दंडों पर विस्तार से लिखा गया है।
ऋग्वेद में कहा गया है कि 'स्वर्ग तीसरे आकाश में बसा है। ये वो जगह है जहां मधु के स्वाद वाली हजारों नहरें बहती हैं'। वहीं अथर्ववेद में इस बात का उल्लेख है कि स्वर्ग में घी के हौज मधु के तालाब शराब से बहती हुयी दूध -दही और पानी से सींचने वाली सब मीठी नहरें और कमल वाली झीलें प्राप्त होती हैं। वहां शहद, घी और मदिरा का भंडार है जिसे पीने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
महाभारत के सातवें अध्याय में लिखा है कि स्वर्ग में बुढापा ,शोक और थकावट नहीं , न वहाँ कोई भय है ;वहाँ गंधर्व और मनोहर अप्सराएं नृत्य, वाद्य,गीतों, नाना प्रकार के हास्य द्वारा मनोरंजन करती हैं। महाभारत के 98वें अध्याय के शांति पर्व में स्वर्ग में अप्सराओं का उल्लेख हैं जो युद्ध में मारे गए वीर, जीवन पर्यन्त पुण्य करने वाले व्यक्तियों को पति रूप में पाने के लिए उतावली रहती हैं।
कितना भयंकर है नर्क
नर्क को धरती के नीचे यानी पातालभूमि में स्थित माना गया है। मनुस्मृति में कहा गया है कि पापियों और ईश्वर में विश्वास न करने वाले लोगों को पापाग्नि में जलाने के लिए नर्क भेजा जाएगा।
यहां प्रहरी आपको अग्नि में जलाएंगे। यहां अंगारों पर चलना होगा, अंगारे ही खाने होंगे और पसीने की बूंदे ही पानी के तौर पर मिलेंगी।
महाभारत के शांति पर्व में शुक्रदेव जी बताते हैं कि यमदूत व्यक्ति के पापों के आधार पर ही उसकी सजा निर्धारित करेंगे। यहां आने के बाद व्यक्ति बलहीन, यौवनहीन और बूढ़ा, कुरुप हो जाएगा। उसके शरीर में असंख्य कीड़ों का दर्द होगा और वो चाह कर भी कुछ नहीं कर पाएगा।
ईसाई धर्म - हैवेन और गेहेन्ना
हिंदू धर्म की तरह ईसाई धर्म हालांकि पुर्नजन्म में विश्वास नहीं करता लेकिन बाइबिल में स्वर्ग और नर्क का विस्तारपूर्वक उल्लेख है।
बाइबिल में कहा गया है कि जो लोग जीसस और उनकी क्रूसीय मौत में विश्वास करते हैं, वो स्वर्ग यानी पैराडाइज के अधिकारी बनेंगे और जो लोग जीसस में विश्वास नहीं करते वो गेहेन्ना यानी नर्क की आग में जलेंगे।
बाइबिल में अध्याय 12 में स्वर्ग को उल्लखित करते हुए पैराडाइज, सेविन और ऑन जैसे शब्दो का प्रयोग किया गया है। यहां कहा गया है कि जो व्यक्ति जीसस में विश्वास रखता है वो वह जीसस के साथ ही सशरीर पैराडाइज में पहुंचता है। यहां दिव्य आकाश है और फूल फलों से भरे उपवन है। यहां एंजेल यानी परियां व्यक्ति की सेवा करेंगी और उसकी इच्छाएं पूरी करेंगी।
बाइबिल में नर्क (गेहेन्ना) का भी उल्लेख बड़े ही भयानक तरीके से किया गया है। बाइबिल के अनुसार यह आग और अंगारों से भरा एक बुरा स्थान है जहां शैतान हमेशा यातना देता रहता है।
जीसस में विश्वास न करने वाली आत्माओं को यहां शुद्ध किया जाता है। यहां नाखून और आंखें नौंच ली जाएंगी। शरीर पर उबलता हुआ तेल डाला जाएगा और उसे नमक से भर दिया जाएगा।
यहां कचरे के ढेर मिलेंगे, रोज कोड़े लगेंगे, अंगारों और कांटों पर लेटना होगा और अनन्त काल तक ये पीड़ा मिलती रहेगी जब तक व्यक्ति जीसस के स्वरूप को स्वीकार न कर ले।
इस्लाम में जन्नत और दोजख
बाकी धर्मों की तरह मुस्लिम धर्म में भी अच्छे और बुरे कर्म के एवज में जन्नत और दोजख की अवधारणा है। कुरान की कुल 114 सूरहों (अध्यायों) में से 101 सूरहों में जन्नत यानी बहिश्त और दोजख का जिक्र किया गया है।
इस्लाम की प्रसिद्ध किताब हदीस में कहा गया है कि जो व्यक्ति नमाज नहीं पढ़ेगा, रोजा नहीं रखेगा, जकात से जी चुराएगा और अल्लाह के नूर को नहीं मानेगा (काफिर), उसे कयामत के दिन दोजख की आग में झोंक दिया जाएगा।
दोजख की आग हमेशा जलती रहती है। ये आग धरती की आग से सौ गुना ज्यादा तेज है। यहां अंगारों पर लोटना होगा, सांप और बिच्छू शरीर में घुस जाएंगे और काटते रहेंगे। खौलते तेल में नहलाया जाएगा, मवाद पीना पड़ेगा। कुरान में कहा गया है कि एक वक्त की नमाज छोड़ने वाले को 80 बरस का दोजख झेलना पड़ेगा।
वहीं जन्नत के विषय में ठीक इसके उलट कहा गया है। कुरान में जिक्र है कि कलमा पढ़ने वाले, अल्लाह को मानने वाले, जकात देने वाले और अपने पैसे पर हज करने वाले शख्स कयामत के दिन जन्नत के हकदार रहेंगे।
जन्नत में शहद की नहरें, फलों से भरे बाग बगीचे, हसीन वादियां और खूबसूरत हूरें मिलेंगी। हमउम्र ये हूरें हमेशा एक जैसी रहेंगी। इनका चेहरा और बदन इतना चमकदार होगा कि सत्तर जोड़ों में भी शीशे की मानिंद चमकेगा। जन्नत में शख्स हमेशा जवान बना रहेगा और उसे कोई रंजो गम, क्लेश नहीं होगा। रूहानी फरिश्ते उसकी खिदमत में हमेशा हाजिर रहेंगे और अल्लाह का साया उस पर हमेशा बना रहेगा।
पारसी धर्म दुजन्हा और गरोदेमान
पारसी धर्म में भी स्वर्ग और नर्क की अवधारणा है। पारसी धर्म में नर्क को 'द्रूजो देमन' कहा गया है जहां पापों के कर्म की भयंकर सजा मिलती है। इसे दजुन्हा भी कहते हैं जो दोजख की तरह प्रतीत होता है।
दजुन्हा धरती की उत्तरी दिशा में स्थति द्रूजो देमन अंधकार तथा दुर्गंधपूर्ण लोक है जहां हमेशा शैतान की चीखें सुनाई देती है। अपने जीवन में एक बुरे म करने वाले शख्स को यहां सौ सौ कोड़े लगते हैं और अंगारों की हथकड़ियां लगाई जाती है।
स्वर्ग के लिए पारसी धर्म में गरोदेमान शब्द (संस्कृत में इसे गरुत्मान माना गया है यानी भगवान विष्णु का वाहन) का प्रयोग किया गया है। सत्कर्म करने वाले सभी मनुष्य जीवन के अंत जब एक पुल से गुजरेंगे तो वो गरोदेमान की राह पर पहुंचेंगे जहां फरिश्ते उन्हें गरोदेमान ले जाएंगे।
गरोदेमान को एक नया संसार बताया गया है जहां किसी भी चीज की कमी नहीं होगा। हर सत्कर्म का सौ गुणा फल भोगने वाले गरोदेमान के निवासी अनन्त काल तक इन सुख सुविधाओं को भोगते रहेंगे।
पैगंबर जोरास्टर की शिक्षाओं में लिखा है कि बुरे कर्म करने वाले लोग दुजन्हा की आग में गिर जाएंगे और ताउम्र उसमे जलते रहेंगे।
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