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Holashtak 2021: होलाष्टक के आठ दिन शुभ कार्यों के लिए है अशुभ

Sun, 21 Mar 2021 07:49 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 21 Mar 2021 07:49 AM IST
सार

होलाष्टक के दौरान विवाह, ग़ृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण एवं विद्यारंभ आदि सभी मांगलिक कार्य या कोई नवीन कार्य प्रारम्भ करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है।

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holashtak 2021 what is holashtak why during holashtak are inauspicious for auspicious works
होलाष्टक 2021: होलाष्टक को व्रत, पूजन और हवन की दृष्टि से अच्छा समय माना गया है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धर्मशास्त्रों के फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक के समय को ही होलाष्टक कहा गया है। इस वर्ष 21 मार्च(रविवार) से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं। होलिका पूजन करने के लिए होली से आठ दिन पूर्व होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखी लकड़ी, उपले व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है। इसी दिन को होलाष्टक प्रारम्भ का दिन माना जाता है। होलाष्टक के दौरान विवाह, ग़ृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण एवं विद्यारंभ आदि सभी मांगलिक कार्य या कोई नवीन कार्य प्रारम्भ करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है।

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दान करना है उत्तम 
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार अष्टमी से पूर्णिमा तक नवग्रह भी उग्र रूप लिए रहते है ,यही वजह है कि इस अवधि में किए जाने वाले शुभ कार्यों में अमंगल होने की आशंका बनी रहती है। इन दिनों में व्यक्ति के निर्णंय लेने की शक्ति भी कमजोर हो जाती है। होलाष्टक को व्रत, पूजन और हवन की दृष्टि से अच्छा समय माना गया है। इन दिनों में किए गए दान से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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भक्त प्रह्लाद और कामदेव से है सम्बन्ध
शिव पुराण के अनुसार देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने अपना प्रेम वाण चलाकर शिवजी की तपस्या को भंग कर दिया। इससे महादेव अत्यंत क्रोधित हो गए,उन्होंने अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से कामदेव को भस्म कर दिया। प्रेम के देवता कामदेव के भस्म होते ही सारी सृष्टि में शोक व्याप्त हो गया। अपने पति को पुनः जीवित करने के लिए रति ने अन्य देवी-देवताओं सहित महादेव से प्रार्थना की। प्रसन्न होकर भोले शंकर ने कामदेव को पुर्नजीवन का आशीर्वाद दिया। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को कामदेव भस्म हुए और आठ दिन बाद महादेव से रति को उनके पुर्नजीवन का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। यह भी मान्यता है कि भक्त प्रह्लाद की अनन्य नारायण भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकश्यप ने होली से पहले के आठ दिनों में प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के जघन्य कष्ट दिए थे। तभी से भक्ति पर प्रहार के इन आठ दिनों को हिन्दू धर्म में अशुभ माना गया है।

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